गरियाबंद। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी प्रशांत कुमार देवांगन ने 11 शिक्षाकर्मियों को 3-3 साल कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सभी आरोपियों पर 1-1 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी शिक्षाकर्मियों पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हथियाने का आरोप है।
गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी प्रशांत कुमार देवांगन ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी हथियाने वाले 11 शिक्षाकर्मियों कारावास की सजा दी है। मामला 2008-09 का है। मैनपुर जनपद पंचायत में शिक्षाकर्मी के पद पर कई शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके कुछ दिनों बाद ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए शिक्षाकर्मी की नौकरी हासिल कर ली है। इसके बाद प्रार्थी कृष्ण कुमार ने मैनपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इस रिपोर्ट के आधार पर मामला गरियाबंद जिला एवं अपर सत्र न्यायालय पहुंचा। कोर्ट ने जांच के बाद शिकायत सही पाई। इस दौरान पूरे मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी आरोप लगे। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने 11 शिक्षाकर्मियों को 3-3 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी आरोपियों पर 1 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जिन शिक्षाकर्मियों को कोर्ट ने सजा सुनाई है, उनमें दो महिला शिक्षाकर्मी भी है। उनमें अरविंद सिन्हा, संजय शर्मा, शंकर लाल साहू, भेगेश्वरी साहू, देवनारायण साहू, दौलत राम साहू, ममता सिन्हा, हेमलाल यादव, पीतांबर राम साहू, शिवकुमार साहू, योगेंद्र कुमार सिन्हा का नाम शामिल है।
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