रायपुर। जंगल सफारी में 17 चौसिंगों की मौत के मामले सफारी के डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध हो गई है। जांच की लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट से तो यही साबित हो रहा है। की जांच रिपोर्ट में नया मोड़ आ गया है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के दस्तावेज बैक डेट में तैयार किए गए हैं। यही नहीं हड़बड़ी में बिना सोचे समझे हस्ताक्षर किए गए हैं।
25 नवंबर से 29 नवंबर के दरमियान जंगल सफारी में हुई 17 चोसिंगों की मौत के मामले द्वारा मुख्य वन संरक्षक सह फील्ड डायरेक्टर उदंती सीता नदी द्वारा गठित की गई तीन सदस्य जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। गौरतलब है कि चोसिंगा शेड्यूल एक का संकटग्रस्त वन्य प्राणी है जंगल सफारी में 25 नवंबर को पांच, 26 नवंबर को तीन, 27 नवंबर को पांच, 28 नवंबर को दो तथा 29 नवंबर को दो कल 17 की मृत्यु हो गई थी। जंगल सफारी के कई कर्मचारियों ने जांच समिति को बताया कि 25 तारीख को डॉक्टर वर्मा द्वारा दो या तीन चेसिंगा का पोस्टमार्टम किया और शेष चोसिंगा को पोस्टमार्टम किए बिना जला दिया गया था। जाँच समिति के अनुसार चिकित्सकों ने मृत चोसिंगा से संबंधीत सभी दस्तावेज 30 नवंबर की शाम को तैयार किए गए है।
इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि कुछ पोस्ट मार्टम रिपोर्ट 25 नवम्बर को बनाना बताया गया है जबकि 25 नवम्बर को स्थल पर अनुपस्थित डॉक्टर सोनम मिश्रा ने भी पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में हस्ताक्षर किए हैं। 26 नवम्बर को डॉ सोनम ने पोस्ट मार्टम किया बताया है उस दिन भी वो अनुपस्थित थी, जो कि बेक डेटिंग की पुष्टि करता है।
27 नवंबर 28 नवंबर और 29 नवंबर के पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर राकेश वर्मा ने भी हस्ताक्षर किए हैं। जबकि वे 26 नवंबर से 30 नवंबर तक छुट्टी पर थे। डॉ वर्मा ने हस्ताक्षर के नीचे तारीख नहीं डाली और बयान में कहा कि उन्होंने राज्य स्तरीय स्वास्थ्य सलाहकार समिति की हैसियत से हस्ताक्षर किए हैं। जांच समिति पाया कि राज्य स्तरीय स्वास्थ्य सलाहकार समिति के बाकी सदस्यों ने पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में सिर्फ सीन (देखा) लिखा है। डॉ वर्मा ने 23 नवम्बर को, 27 तारीख से 30 तारीख तक 4 दिन की छुट्टी शिरडी जाने के लिए मांगी थी। लेकिन 26 तारीख को डायरेक्टर जंगल सफारी ने चुनावी आचार संहिता के कारण अवकाश अस्वीकृत कर दिया।
इसके बावजूद डॉक्टर वर्मा 26 नवंबर से 30 नवंबर तक छुट्टी पर रहे। डॉक्टर वर्मा लिखित आदेश की अवहेलना कर कर्तव्य से अनुपस्थित हो गए। 26 नवंबर को संचालक सह वनमंडल अधिकारी जंगल सफारी ने फोन करके डॉक्टर वर्मा को लगातार मर रहे चोसिंगा की घटना को ध्यान में रखकर तत्काल ही सफारी आने हेतु निर्देशित किया था। लेकिन डॉ वर्मा ने डायरेक्टर द्वारा छुट्टी नहीं देने पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से व्हाटहप्स पर छुट्टी ले ली थी।
वन्य जीव प्रेमी इस मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भी जिम्मेदार और दोषी ठहरा रहे हैं कि उन्होंने जंगल सफारी डायरेक्टर से पूछे बिना डॉक्टर की छुट्टी कैसे स्वीकृत कर दी ? अगर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), संचालक से पूछ लेते तो संचालक बता देते कि जंगल सफारी में चौसिंगा मर रहे हैं। इसी प्रकार जंगल सफारी की दूसरी डॉक्टर सोनम ने 25 नवम्बर से 27 नवम्बर तक छुट्टी मांगी थी जो कि अस्वीकृत कर दी गई थी। इसके बावजूद डॉ सोनम 24 नवम्बर से 26 नवम्बर अनुपस्थित रही।
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