बिलासपुर। आठ वर्ष या उससे अधिक की सेवा के बाद 2018 में संविलियन पाने वाले शिक्षकों ने 2020 में 2 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों के संविलियन को आधार बनाकर वेटेज की मांग करते हुए कोर्ट में मामला दायर किया था। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
गरियाबंद के सनत कुमार सेन और बलवंत कुमार बघेल ने हाईकोर्ट में इस बात को लेकर याचिका दायर की थी कि उनकी सेवा 8 वर्ष से अधिक की थी जिसके बाद शासन द्वारा निर्णय लेकर 2018 में उनका संविलियन किया गया। लेकिन बाद में 2020 में 2 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों का भी संविलियन किया गया और उन्हें भी वही वेतनमान प्राप्त हुआ जो 2018 में संविलियन होने वाले शिक्षकों को दिया गया। ऐसे में अपनी लंबी सेवा को आधार बनाकर उन्होंने वेटेज देने की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने खारिज करते हुए इसे हस्तक्षेप के अयोग्य बताया। अदालत ने कहा कि जब भी किसी कर्मचारी का एक विभाग से दूसरे विभाग में संविलियन होता है तो उन्हें नए विभाग के पद के अनुरूप वेतनमान दिया जाता है जो इस केस में भी हुआ है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबी सेवा अवधि के आधार पर अधिक वेतन प्रदान करने के लिए शासन को दिशानिर्देश नहीं दिया जा सकता। यदि कर्मचारी चाहे तो राज्य सरकार से इसके लिए निवेदन कर सकते हैं और इसी के साथ कोर्ट ने इस मामले को निराकृत कर दिया है ।
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