बिलासपुर। पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्रों, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया में स्कूलों में चल रही भर्राशाही, अनियमितताओं और शिक्षकों के द्वारा किये जा रहे अनैतिक कार्यों के संबंध में लगातार समाचार प्रकाशित एवं प्रसारित हो रही हैं। इससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है। विशेषकर शिक्षकों की दारूबाजी और लंपटाई को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खासे परेशान है। इन्ही सब मुद्दों को लेकर पिछले दिनों वीडियों कांफ्रेंसिंग लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की बैठक ली थी और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। बैठक के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए एक गाईड लाइन जारी की है। जिसका कड़ाई से पालन कराने के निर्देश सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए गए है। विभाग ने सभी प्राचार्यों एवं शिक्षकों को सचेत किया है कि अपना कार्य अनुशासित रहते हुए ईमानदारी पूर्वक करें। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित होने पर संस्था प्रमुख/शिक्षक, संकुल समन्वयक एवं विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी जवाबदेह होंगे। जारी गाईड लाइन में खा गया है ….
1. शिक्षक अनुशासित रहें एवं ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
2. विद्यालय में सभी शिक्षक एवं कर्मचारी समय पर उपस्थित होवें एवं पूरे समय शाला में
रहकर निर्धारित कार्य करें।
3 विद्यालय में सभी शिक्षकों की उपस्थिति का निरीक्षण अधिकारियों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जावे।
4. शालाओं में आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में शासन एवं मंडल के निर्देशानुसार आवश्यक सावधानी रखी जाए।
5. शिक्षक अपनी मर्यादा में रह कर कार्य करे तथा अनैतिक आचरण यथा छात्राओं के साथ बेडटच, महिला कर्मियों के साथ अभद्रतापूर्वक व्यवहार, शिक्षकों द्वारा परिसर में मद्यपान
करना अथवा मद्यपान करके स्कूल आना आदि पर कड़ाई से रोक लगाई जावे।
6. वित्तीय अभिलेखों का नियमानुसार संधारण किया जावे।
7. विद्यालय में उपस्थित होने के पश्चात् शिक्षक आबंटित कक्षाओं का अनिवार्य रूप से अध्यापन कार्य करें।
8. शालाओं में बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
9. यह अनुभव किया जा रहा हैं कि जिला स्तर, विकास खण्ड स्तर एवं आहरण संवितरण अधिकारी स्तर पर संतान पालन अवकाश एवं अन्य अवकाश के आवेदनों को बिना परीक्षण किये अवकाश स्वीकृत किया जा रहा हैं। इससे शालाओं की व्यवस्था एवं विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभवित हो रही है। अतः निर्देशित किया जाता है कि आवेदनों का आवश्यकता के आधार पर परीक्षण करें एवं पर्याप्त कारण हो तभी संतान पालन अवकाश एवं अन्य अवकाश स्वीकृत किया जाए।
10. जिले के जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक संचालक, जिला मिशन समन्वयक, सहायक परियोजना अधिकारी, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, सहायक विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी एवं संकुल समन्वयक अनिवार्यतः स्कूलों का निरीक्षण करें जिससे शालाओं में कसावट बनी रहें तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थित निर्मित न होने पाये।
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