रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ शाहिद अली को बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्तगी का यह आदेश गुरुवार को यूनिवर्सिटी के कुलसचिव चंद्रशेखर ओझा ने जारी किया है। शाहिद अली पर फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हथियाने का आरोप है।
यूनिवर्सिटी के कुलपति बलदेव शर्मा ने बीते 27 मार्च को ही यह आदेश जारी कर दिया था। आदेश की तिथि से ही जनसंचार के विभागाध्यक्ष शाहिद अली को विश्विद्यालय ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी है। जारी आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ लोक आयोग की अनुशंसा पर उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों से गठित सूक्ष्म जांच समिति की रिपोर्ट और विश्वविद्यालय के 58वीं कार्य परिषद की आपात बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। बता दें कि विश्वविद्यालय की जांच में पता चला कि शाहीद अली प्रोफेसर पद की नियुक्ति के लिए पात्र नहीं थे। लेकिन फर्जी दस्तावेजों के सहारे उन्होंने नौकरी हथिया ली थी। गुरुघासीदास विश्वविद्यालय ने भी उनको ऐसी कोई अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने से इंकार कर दिया है। बर्खास्तगी आदेश में भी कहा गया है की विश्वविद्यालय में रीडर/एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं थे और न आवेदन के साथ दिए गए आपके दस्तावेज पद के लिए अनिवार्य अर्हता को पूर्ण करते थे। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छ. ग.) ने भी डॉ. शाहिद अली को अधिकृत रूप से ऐसा कोई शिक्षण अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने से दिनांक 22.03.2023 को लिखित इनकार किया है। आपको बता दें डॉ. शाहिद अली के खिलाफ विवि के ही प्रोफेसर शैलेंद्र खंडेलवाल ने 2014 में शिकायत की थी। प्रो. खंडेलवाल ने पुलिस को बताया था कि डॉ शाहिद अली ने कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के सहारे विवि में एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति प्राप्त की है। डॉ. अली ने जो दस्तावेज नौकरी पाने के लिए जमा किए हैं, उनकी जांच करने की मांग भी प्रोफेसर खंडेलवाल किया था। प्रो. खंडेलवाल ने डॉ. अली के कुछ दस्तावेज भी पुलिस को दिए थे। डॉ खंडेलवाल की शिकायत पर पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत केस दर्ज करके जांच में लिया था। मामले में शाहिद ने रीडर की नौकरी पाने के लिए अपनी पत्नी गोपा बागची से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया था। उनकी पत्नी गोपा बागची गुरु घासीदास में रीडर के पद पर थीं, जिसे फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने का मामला सामने आते ही निलंबित कर दिया गया था। इस प्रकरण में बिलासपुर के घासीदास विवि ने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से किसी भी प्रकार के प्रमाण पत्र जारी करने से इंकार किया है।
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