करोड़ो के जमीन की हेराफेरी, पटवारी-तहसीलदार की भूमिका संदेह के दायरे में

बिलासपुर। बहतराई में सड़क की जमीन को सरकारी जमीन में बैठाकर सरकार को ढाई करोड़ का चूना लगा दिया गया है। जिस जमीन पर सड़क बनी है वो एक किसान की थी जिसे अविभाजित मध्यप्रदेश के समय सरकार से मुआवजा मिल चुका है।

राजस्व विभाग के अधिकारी सरकारी जमीन को लेकर कैसे कैसे खेल खेल रहे है इसका ताजा तरीन उदाहरण बहतराई से आ रहा है। बहतराई ग्राम पंचायत की खसरा नंबर 310 जिसका रकबा 0.113 हेक्टेयर है। ये जमीन किसी समय एक किसान की थी अब इस जमीर पर PWD की सड़क बन चुकी है। इसका मुआवजा भी किसान को मिल चुका है। जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की करवाई अविभाजित मध्यप्रदेश के समय हुई थी। लेकिन तब के पटवारी ने रिकार्ड दुरुस्त नही किया। जिसके कारण जमीन अभी भी किसान के नाम पर चला आ रहा था। इसी का फायदा वर्तमान पटवारी अनिल डोडवानी ने उठाया और जमीन को उसने किसानों के वरिसानों के नाम पर चढ़ा दिया। यही नही पटवारी ने विक्रय करने के लिए नकल भी जारी कर दिया। जमीन को किसानों के वरिसानों ने बेच भी दिया। जमीन बिक्री के बाद सीमांकन के बहाने सड़क की जमीन को सड़क किनारे की सरकारी जमीन में फिट कर दिया। अब वह जमीन करोड़ो की हो गई। जमीन की इस हेराफेरी में एक करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हो गया है। दूसरी ओर इस हेराफेरी में सरकार को ढाई करोड़ रुपए का चूना लग चुका है। एक तो सरकारी जमीन हाथ से गई ऊपर से ऊपर से पटवारी और जमीन दलाल एक झटके में लाल हो गए।

00 तहसीलदार ने कर दिया नामांतरण

पटवारी ने अपना खेल खेलने के बाद तहसीलदार नारायण गबेल को भी भरोसे में ले लिया। किसानों के वारिसानो के नाम पर जमीन आने के बाद जमीन बेच दी। इसके बाद उसने जमीन का नामांतरण कर तीन टुकड़ों खसरा नंबर 310/1, 310/2 और 310/3 में बांट दिया। नामांतरण को लेकर पटवारी ने तहसीलदार को कैसे भरोसे में लिया होगा और इतनी आसानी से नामांतरण कैसे हुआ होगा इसकी कल्पना स्वाभाविक रूप से की जा सकती है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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