
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासा साहित्य मंच ने विश्व कविता दिवस के अवसर पर बिलासपुर प्रेस क्लब में काव्य पर चर्चा को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार संजय कुमार पांडेय ने हिंदी साहित्य के सभी कालों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पूर्व के तीनों काल काव्य के काल ही रहे और संभवत: बहुत कम गद्य की रचना हुई लेकिन 1900 से लेकर अब तक को गद्य काल कहा जाता है लेकिन इस काल में नई कविताएं ज्यादा लिखी जा रही है। महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने कविता को छंद से मुक्त किया लेकिन उन्होंने कविता की आत्मा की महत्ता को कम नहीं किया। बाद के कवियों ने भी इस बात का ध्यान रखा। कविता में तुक और छंदों की अनिवार्यता तो न रही लेकिन यदि भाव नहीं है तो उसे कविता नहीं कहा जा सकता। भाव कविता की आत्मा है। हालांकि शब्द और भाव के समन्वय से ही कविता पूरी होती है। इसमें यति और गति होना चाहिए।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कविता को परिभाषित करते हुए लिखा है कि कविता वह साधन है जिसके द्वारा सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक संबंध की रक्षा और निर्वाह होता है। कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार द्वारिका प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि उन्हें लगता था कि कविता उनके बस की बात नहीं लेकिन उन्होंने वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की प्रेरणा व उत्साहवर्द्धन से कविता लिखी और वे अब कह सकते हैं कि प्रेरणा से भी कविता लिखी जा सकती है। उन्होंने अपने द्वारा लिखी पहली कविता भी सुनाई। विशिष्ट अतिथि विक्रमधर दीवान ने कहा कि प्रेरणा के साथ ही प्रतिस्पर्धा से भी अच्छी कविताएं लिखी जा सकती है। उन्होंने अपनी कविता का पाठ किया। अजय शर्मा ने एयरपोर्ट को लेकर छत्तीसगढ़ी में लिखी अपनी कविता का पाठ किया। साथ ही कोरोना पर कविता पढ़ी। कार्यक्रम के संयोजक वेदुला वेंकट रमणा किरण, भास्कर मिश्रा पारस व सुनील शर्मा ने कविता पाठ किया। इस दौरान सनत तिवारी, संदीप शर्मा, अजय शर्मा, सालिकराम साहू, सतीश यादव, मोहन राजपूत सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद थे।
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