बिलासपुर। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के खतरनाक अपशिष्टों के कारण जीवन खतरे में है। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलेक्टर को आदेश दिया है कि याचिका में जो आरोप लगाए गए है उसकी जांच करें। जांच टीम में याचिकाकर्ताओं को शामिल करें।

बालको प्रबंधन कोरबा की फिजां में जहर घोल रहा है। एल्युमिनियम बनाने की प्रक्रिया में अपशिष्ट के रूप में निकलने वाले सायनाइड, अमोनिया और सोडियम को खुले में फेंका जा रहा है। जो पानी मे घुलके हसदेव नदी के साथ छोटे-छोटे जल स्रोतो में पहुंच रहा है। यही नहीं ऐसे खतरनाक अपशिष्ट कबाड़ियों के पास भी पहुंच रहे है। जिससे कई तरह के भयंकर बीमारियों का कारण बन रहा है। इन्ही सब मामलों को लेकर बालको के पूर्व एसोसिएट मैनेजर उमेश कुमार सिंग और किशोर चंद्रा ने हाईकोर्ट में राजीव कुमार श्रीवास के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश किया था। मामले में कहा गया है कंपनी की और से की जा रही घोर लापरवाही को लेकर कलेक्टर, पर्यावरण विभाग को शिकायत किया गया था। लेकिन कोई करवाई नही की गई। एल्युमिनियम बनने और बनाने की प्रक्रिया में अत्यंत घातक रासायनिक पदार्थ सायनाइड का उत्सर्जन होता है। यह सायनाइड हर महीने 360 किलो निकलता है। इसे प्रबंधन द्वारा खुले में फेंक दिया जाता है। ये अपशिष्ट पदार्थ पानी मे घुलकर या तो जमीन के अंदर चला जाता है या फिर पानी मे बहकर हसदेव नदी और अन्य छोटे जल स्रोतों में जाकर मिल जाता है। पानी के जरिए ये जहर लोगो के शरीर मे पहुंच रहा है। जिसके कारण लोगों को कैंसर जैसी भयंकर बीमारी हो रही है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और पीपी साहू ने कोलेक्टर को आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करे। साथ ही जांच टीम में याचिका कर्ताओ को शामिल करें।
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