बिलासपुर। फर्जीवाड़ा करके पिता की संपत्ति हड़पने का एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। मामले में एक भाई और बहन ने अपने ही छोटे भाई पर संपत्ति हड़पने के लिए पिता की हत्या करने का भी आरोप लगाया है। इस पूरे मामले में एक आरक्षक की भूमिका भी संदिग्ध है।

मामले की पूरी कहानी कुछ इस तरह है- ग्राम बेलटुकरी के स्व गणेश प्रसाद शर्मा के तीन पुत्र देवेंद्र शर्मा, ब्रजेन्द्र शर्मा, रामेंद्र शर्मा और एक पुत्री नंदनी शुक्ला है। गणेश प्रसाद शर्मा की मृत्यु 1 दिसंबर 2017 में हो गई। मृत्यु के पहले वह अपने बड़े पुत्र देवेंद्र शर्मा और छोटे पुत्र रामेंद्र शर्मा के साथ रहते थे। मृत्यु के पहले गणेश प्रसाद शर्मा ने अपने सभी बच्चों के बीच संपत्ति का बंटवारा कर दिया था। बंटवारे के बाद बेलटुकरी गांव में 6.50 एकड़ कृषिभूमि और गाँधीवार्ड कस्तूरबा नगर का मकान अपने पास रख लिया था। ये संपत्ति उनकी मृत्यु के बाद सभी भाई-बहन के बीच बराबर हिस्से में बंटना था। गणेश प्रसाद शर्मा बिलासपुर के जिस मकान में अपने दो पुत्रों के साथ रहते थे वह उनके नाम पर ही था। लेकिन छोटे पुत्र ने एक फर्जी वसीयत बनाकर पिता के नाम की कृषिभूमि, बिलासपुर का मकान और बैंक बैलेंस सब अपने नाम पर करा लिया है। इस फर्जीवाड़े में बड़ा भाई देवेंद्र छोटे भाई रामेंद्र के साथ है। अब पिता की संपत्ति पाने के लिए मंझला भाई ब्रजेन्द्र शर्मा और नंदनी शुक्ला को भटकना पड़ रहा है।

इस मामले को लेकर मंझले भाई ब्रजेन्द्र शर्मा की पत्नी दुर्गा शर्मा और नंदनी शुक्ला ने सिविल लाइन थाने के अलावा आईजी से शिकायत की है जिसमे दोनों ने अपने बड़े भाई देवेंद्र शर्मा और छोटे भाई रामेंद्र शर्मा पर संपत्ति के लालच में पिता की हत्या करने का आरोप लगाया है। अपने शिकायत में दोनों ने कहा है कि उनके पिता की मृत्यु 1 दिसंबर 2017 को सुबह 8 बजे हो गई थी। लेकिन उनके भाइयों ने परिजनों को एक बजे बाद सूचना दी। यही नही परिवार के सदस्य पहुंचते इसके पहले ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया। शिकायत के अनुसार नंदनी शुक्ल ने हत्या की आशंका इस बात से भी लगा रही है कि मृत्यु से पहले उनके पिता ने अपने अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद तिवारी और परिवार के सदस्यों के बीच कहा था कि संपत्ति अपने नाम पर कराने के लिए देवेंद्र और रामेंद्र उनके साथ मारपीट करते है, कमरे में बंद कर देते है। नंदनी शुक्ला ने अपने शिकायत में यह भी कहा है कि उनके पिता सेवा निवृत्त शिक्षक थे इसलिए उनके बैंक खाते में भी अच्छी-खासी राशि जमा थी। लेकिन इसका भी कोई हिसाब-किताब नही है।
00 आरक्षक की भूमिका संदिग्ध
नंदनी शुक्ल का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में छोटे भाई रामेंद्र शर्मा के अलावा उनका साल अनिल कुमार मिश्रा भी शामिल है। फर्जी वसीयत तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। अनिल मिश्रा पुलिस विभाग में आरक्षक है जो अभी जांजगीर जिले में पदस्थ है। आरक्षक के खिलाफ करवाई करने के लिए आईजी से भी शिकायत की गई है।
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