रायपुर। प्रदेश की राजधानी रायपुर में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आ रहा है। जिसमें कॉलेज के लिए आरक्षित डेढ़ सौ करोड़ रुपए की जमीन बिल्डर के नाम पर चढ़ा दी गई है। अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर कॉलेज के लिए आरक्षित जमीन बिल्डर के नाम पर कैसे चढ़ गई ? कौन है वो अधिकारी जो बेशकीमती जमीन मुफ्त में बिल्डर को दे दिया ? क्या कोई बड़ा लेनदेन हुआ है ? यदि हुआ है तो इस सौदे के पीछे कौन है ?
प्रदेश की राजधानी रायपुर के बारे ज्यादातर लोगों की सोच यही है यहां भ्रष्टाचार नहीं होता होगा, सरकारी जमीन की हेराफेरी नहीं होती होगी और होती भी होगी त्वरित कार्रवाई हो जाती होगी। लोगों के इस सोचने के पीछे एक बड़ा कारण यही है कि यहां प्रदेश के मुखिया यानी मुख्यमंत्री रहते है, राज्यपाल रहते है, चीफ सेक्रेटरी रहते है और पुलिस विभाग के प्रमुख DGP समेत तमाम बड़े अफसर जिनके दम पर ये प्रदेश चल रहा है यहीं रहते है। लेकिन लोगों को ये धारणा बदल लेनी चाहिए क्योंकि यहां भी वो सारे अपराध होते है जो प्रदेश के अन्य जिलों या कस्बों में होता है। यहां जमीन की हेराफेरी भी होती है। जी हां हम बात कर रहे है शहर से लगे अमलीडीह में डेढ़ सौ करोड़ रुपए की सरकारी जमीन के बारे में। यहां पर कॉलेज के लिए 9 एकड़ जमीन आरक्षित की गई थी जिसे एक बिल्डर के नाम पर चढ़ा दिया गया है। अब कोई पटवारी, तहसीलदार, SDM या कलेक्टर मुफ्त में तो डेढ़ सौ करोड़ रुपए की सरकारी जमीन किसी के नाम पर नहीं चढ़ाएगा। यह पूरी प्रक्रिया गुपचुप तरीके से की गई है और अब जमीन आबंटन की जानकारी मिलने पर ग्रामीण भडक़ गए हैं। ग्रामीणों ने तत्काल आबंटन निरस्त करने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। नहीं तो धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। रायपुर नगर निगम सीमा के गांव अमलीडीह में 3.203 हेक्टेयर यानी करीब 9 एकड़ जमीन सरकारी कॉलेज के लिए आरक्षित की गई थी। सरकारी कॉलेज अभी स्कूल बिल्डिंग में संचालित है। पिछली सरकार में रायपुर ग्रामीण के विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कॉलेज के लिए सरकारी जमीन आरक्षित कराई थी। इस जमीन पर काफी पहले से बिल्डरों की भी नजर लगा रखे थे और अपने अनुकूल कलेक्टर के आते ही खेला कर गए। एक बड़े बिल्डर रामा बिल्डकॉन के संचालक राजेश अग्रवाल ने उस समय आरक्षित जमीन के आबंटन के लिए आवेदन किया था, न सिर्फ रामा बिल्डकॉन बल्कि इस्कॉन मंदिर ट्रस्ट ने भी इस जमीन के लिए आवेदन किया था। पिछली सरकार में सरकारी जमीन की नीलामी की नीति रही है। चूंकि कॉलेज बिल्डिंग-खेल मैदान के लिए आरक्षित होने की वजह से बिल्डर के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बताया गया कि सरकार बदलने के बाद प्रभावशाली लोगों ने बिल्डर को उक्त जमीन को आबंटित करने के लिए पहल की। इसके बाद इसका तोड़ निकालते हुए रामा बिल्डकॉन के पुराने आवेदन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें आबंटित कर दी। यह आबंटन 28 जून को राजस्व विभाग ने किया है। खास बात यह है कि सब कुछ आबंटन पिछली सरकार की नीति के मुताबिक किया गया। जबकि सरकार बदलने के बाद सरकारी जमीन के आबंटन और फ्रीहोल्ड संबंधी सभी निर्देशों को 11 जुलाई को निरस्त कर दिया गया था। चर्चा है कि जमीन का आबंटन आदेश जारी होने से पहले बैक डेट में किया गया है। कॉलेज की जमीन बिल्डर को आबंटित होने की खबर अब जाकर ग्रामीणों को हुई है, और इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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