रायगढ़। थोक दवा कारोबारी सांवरिया गोयल को स्पेशल कोर्ट ने एक साल छह महीने की जेल और दो लाख रुपए का अर्थदंड दिया है। व्यापारी पर थोक में नशीली कफ सिरप बेचने का आरोप है। कफ सिरप नशेड़ियों को बेचकर उड़ीसा और बिहार के दवा दुकानों का फर्जी इनवाइस बनाया था।
मिली जानकारी के अनुसार प्रगति इंटरप्राइजेज के संचालक सांवरिया गोयल के विरुद्ध तत्कालीन औषधि निरीक्षक कमलकांत पाटनवार रायगढ़ ने मामला दर्ज कराया था। इसके अनुसार 1 जनवरी 2010 से 5 मार्च 2011 के बीच प्रगति इंटरप्राइजेज रायगढ़ से फेंसिडिल कफ सिरप का फर्जी सेल इनवाइस बनाकर कई दवा विक्रेताओं को सप्लाई की गई थी। फर्म के बिलों की जांच करने पर पता चला कि कोडिन सल्फेट वाली कफ सिरप ओडिशा और बिहार के दवा विक्रेताओं को बेची गई है। विभाग ने इसकी जांच की तो इनवाइस फर्जी पाई गई। जिन संस्थानों के नाम पर इनवाइस बनाकर सिरप बेचना दिखाया गया वे या तो बंद थीं या फिर उनके संचालकों ने किसी तरह की दावा मांगने से इनकार कर दिया था। जिन फर्मों के नाम सेल इनवाईस में दर्शाया गया है उन फर्म के संचालकों ने प्रगति इंटरप्राईजेस से किसी भी प्रकार के व्यापारिक लेनेदेन करने से इनकार किया और उक्त सिरप की खरीदी किये जाने से भी मना किया। जांच में यह बात सामने आई कि प्रगति इंटरप्राइजेस के संचालक सांवरिया गोयल ने कूटरचित इनवाईस सेल तैयार कर फैंसेडिल सिरप को नशा करने वाले व्यक्तियों को अथवा नशा के लिए प्रेरित करने का कार्य करने वाली फर्मों को विक्रय किया गया है। जानबूझकर राज्य से बाहर की फर्मों के कूटरचित इनवाईस प्रस्तुत किये गये हैं। वहीं विभागीय कार्रवाई करते हुए औषधि निरीक्षक कमलकांत पाटनवार ने औषधि और प्रसााधन सामग्री अधिनियम की धारा 18 ए (6), 27 डी के तहत 12 सितंबर 2014 को मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट रायगढ़ के समक्ष परिवाद प्रस्तु किया गया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से 15 जनवरी 2020 को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के विषेष न्यायालय में प्रकरण प्राप्त होने पर सभी पक्षों की सुनवाई की गई। प्रकरण की सुनवाई और प्रस्तुत किये गये साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने प्रगति इंटरप्राइजेस के संचालक सांवरिया गोयल को औषधि और प्रसााधन सामग्री अधिनियम का उल्लंघन करने का दोषी पाया। इस पर न्यायालय ने सांवरिया गोयल को एक वर्ष 6 माह का सश्रम कारावास व दो लाख रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड की राशि अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा का निर्णय सुनाया है।
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