जंगल मे कुत्तों का आतंक, चीतलों को बना रहे है अपना शिकार, रेंजर, बीटगार्ड फील्ड से नदारत

बिलासपुर। सीपत सर्किल के जंगल मे तीन दिन के अंदर दो चीतल की मौत हो चुकी है। फील्ड से रेंजर, बीटगार्ड नदारत है और कुत्ते चीतलों को अपना शिकार बना रहे है। बताया जा रहा है इस क्षेत्र से रेंजर और कई बीटगार्ड गायब है।

जंगल मे शेर का आतंक हो तो ये पॉजिटव न्यूज हो सकता है लेकिन जंगल मे कुत्तो का आतंक हो जाय तो वह विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है। जी हां, लेकिन हो यही रहा है, बात हो रही है सीपत सर्किल के जंगल की। तीन दिन के अंदर इस क्षेत्र में कुत्तो के हमले से 2 चीतलों की मौत हो चुकी है। सीपत सर्किल के भरूवाडीह बिट कक्ष क्रमांक 4 रिजर्व फारेस्ट के जंगल से डेढ़ वर्षीय मादा चीतल मंगलवार को दोपहर लगभग 1 बजे ग्राम भरूवाडीह बस्ती के समीप बंधिया तालाब में पानी पीने पहुँची। इसी दौरान कुत्तों ने प्यासी मादा चीतल पर हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। इसकी सूचना ग्रामीणों ने गांव के ही वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्यारेलाल बिंझवार को दी। प्यारेलाल ने मौके पर जाकर कुत्तों को भगाया और गम्भीर रूप से घायल चीतल को पानी पिलाने का प्रयास किया। इसके बाद समिति के अध्यक्ष ने घटना की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी। अधिकारियों के निर्देश पर मेटाडोर से इलाज के लिए कानन पेंडारी ले जाया गया। जहां इलाज होने से पहले ही दोपहर 3:30 बजे घायल चीतल ने दम तोड़ दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने पंचनामा कर पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम कराया और फदहाखार में मृत चीतल का दाह संस्कार कर दिया गया। एक दिन पहले भी इस क्षेत्र एक चीतल को कुत्तों ने नोच लिया था, जिसकी मौत हो गई थी।

00 वन्यजीव क्यों भाग रहे है तालाब की ओर

लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से एक सवाल और उठता है कि पानी की तलाश में वन्यजीव गांव के तालाबों की ओर क्यों आ रहे है? क्या जंगल के अंदर की जलस्रोत सुख गए है ? क्या मनरेगा के तहत जलस्रोत बनाने का काम केवल कागजो में हो गया है ? यदि जंगल के अंदर पिने के लिए पानी नही है तो इस भीषण गर्मी में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग क्या कर रहा है ?

00 होली के दिन से गायब है बिट गार्ड

भरूवाडीह बिट के वन संरक्षक कान्हा वर्मा होली के दिन से अपने ड्यूटी क्षेत्र को भगवान के भरोशे छोड़कर गायब है। बिट गार्ड कान्हा अगर गायब नही रहते तो शायद इस तरह की घटना नही घटती और एक बेजुबान जानवर की बलि नही चढ़ती। वर्तमान में लकड़ी तस्करों को विभाग द्वारा खुला निमंत्रण दिया गया है क्योंकि विभाग के छोटे से बड़े अधिकारी कर्मचारी मुख्यालय से नदारत रहते है घरों से ही जंगल की निगरानी करते है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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