मरवाही के जंगल में भालू का शिकार, शव से कई अंग गायब, विभाग को 10 दिन बाद पता चला

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मनेंद्रगढ़ वनमंडल और मरवाही वनमंडल की सीमा पर एक भालू का क्षतविक्षत शव मिला है। यह शव मरवाही वन मंडल के उषाड़ बीट में मिला है और लगभग 8 से 10 दिन पुरानी है। शव से कई अंग गायब है लिहाजा शिकार की शत प्रतिशत संभावना है। विडंबना तो ये है वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी हफ्तेभर बाद मिलती है।

गौरेला पेंड्रा मरवाही में मरवाही वनमंडल के उषाड़ गांव के जंगल में भालू का क्षत-विक्षत शव मिलने का मामला सामने आया है। भालू का शव मनेंद्रगढ़ वनमंडल और मरवाही वनमंडल की सीमा पर मिला है। भालू के शव से लगभग सभी महत्वपूर्ण अंग गायब है। लिहाजा भालू के शिकार होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल मामले की जानकारी मिलते ही मरवाही वन विभाग की टीम मौके पर पहुचकर भालू के शव का पोस्टमार्टम करवाने की बात कही है। जिसके बाद ही भालू के मौत की सही वजह सामने आएगा। मरवाही वन मंडल के एसडीओ नोहर सिंह मरकाम की माने तो मामले की जानकारी मिलते ही वो मौके पर जाकर शव की शिनाख्त किये है। शव लगभग 15 दिन पुराना लग रहा है और भालू का शव क्षत-विक्षत अवस्था मे मिला है। कई अंग नही है, शिकार की आंशका से इनकार भी नही किया जा सकता। फिलहाल भालू के शव का पोस्टमार्टम के बाद ही पूरा मामला स्पस्ट होगा। इस घटना से स्पष्ट हो गया है मरवाही वन मंडल में जंगल राज चल रहा है। लकड़ी तस्कर से लेकर वन्य प्राणियों के शिकारी सक्रिय है। विभाग की कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भालू के शिकार होने की जानकारी अधिकारियों को एक हफ्ते बाद मिल रही है। मतलब साफ है अधिकारी नियमित गस्त नहीं कर रहे है और ऑफिस में बैठकर जंगल की व्यवस्था देख रहे है।

बता दें कि दो महीने पहले भी गंगनई नेचर कैंप सालेकोटा के जंगल में मादा भालू शिकारियों के जाल में फंस गई गई थी। स्थानीय युवकों ने भालू को जब तक जाल से निकाल पाते तब तक उसकी दम घुटने से मौत हो गई। जबकि मौके पर मौजूद मादा भालू के 8 महीने के नर शावक को सुरक्षित बचा लिया।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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