भैंसाझार परियोजना में मुआवजा घोटाला, RI मुकेश साहू बर्खास्त, लोरमी के पवन अग्रवाल को पहुंचाया था 3.45 करोड़ का फायदा

बिलासपुर। भैंसाझार परियोजना में मुआवजा घोटाला को अंजाम देने वाले सबसे छोटे प्यादे RI मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया गया है। पटवारी रहते हुए साहू ने पवन अग्रवाल की कृषि भूमि को व्यवसायिक भूमि बताकर 3 करोड़ 42 लाख 17 हजार रुपए का मुआवजा दिलाया था। इस घोटाले में साहू ने ऐसे सैकड़ों लोगों को मुआवजा दिलाया और बदले में ज्यादातर लोगों से आधी रकम ले लिया था।

कोई भी बड़ी परियों आते ही जनता को लाभ मिले या न मिले लेकिन अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार, सप्लायरों की लाटरी लग जाती है। भैंसाझार परियोजना में अभी तक सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हो चुके है लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा है। इतना जरूर है कि बिलासपुर की अरपा सुख जाती है तो पानी छोड़कर नदी को गिला कर लेते है। लेकिन परियोजना में शुरू से लेकर अबतक भ्रष्टाचार की कहानी अंतहीन है। शुक्रवार को जिला प्रशासन ने तखतपुर के राजस्व निरीक्षक मुकेश साहू को तत्काल प्रभाव बर्खास्त कर दिया है। साहू पर भ्रष्टाचार कर शासन को 3.42 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। साहू ने पटवारी रहते हुए कई चमत्कारिक कार्य को अंजाम दिया है। जिसकी जमीन से नहर कोसों दूर है उसे मुआवजा दिला दिया, जिसकी जमीन डेवर्टेड नहीं थी उसे मिनटों में डेवर्टेड बना दिया, खेती की जमीन को व्यवसायिक बना दिया। इसका सीधा असर मुआवजे की राशि पर पड़ी। जिस जमीन का मुआवजा 10 लाख बन रहा था उनका मुआवजा सीधे डेढ़ करोड़ पहुंच गया। जिस मामले में RI साहू को बर्खास्त किया गया है वह जमीन सकरी की है। सकरी खसरा नं. 1/6 या 1/4 के अर्जन एवं व्यपवर्तन के संबंध में खसरा पांचसाला वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक में वर्ष 2013-14 के कॉलम में वर्ष 2019-20 लिखकर खसरा नंबर 1/4 रकबा 0.90 एकड़ कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि में परिवर्तित करके रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। खसरा पांचसाला वर्ष 2016-17 से वर्ष 2020-21 तक में वर्ष 2016-17 में खसरा नंबर 1/4 रकबा 0.90 एकड़ प्रिंटेड दर्ज है, जिसे नीली स्याही से दुरूस्ती कर रकबा 0.40 एकड़ किया गया है। इसके बाद नया खसरा नंबर 1/6 रकबा 0.50 एकड़ नया खसरा बटांकित किया गया है। अर्जित किये जाने वाली भूमि का प्रारंभिक प्रकाशन धारा 11, 19 अधिसूचना में खसरा नंबर 1/4 या 1/6 सम्मिलित नहीं था। धारा 12 में खसरा नंबर 1/4 एवं 1/6 का उल्लेख नहीं है। मुकेश साहू ने अपने प्रतिवेदन दिनांक 22.07.2019 द्वारा खसरा नंबर 1/4 रकबा 0.01 एकड एवं 1/6 रकबा 0.15 एकड़ को प्रभावित बताया है। बाद के प्रतिवेदन में खसरा नंबर 1/4 में अर्जित रकबा को 0.03 एकड़ एवं खसरा नंबर 1/6 को व्यववर्तित भूमि रकबा 0.26 एकड़ बताया है। इसके बाद कागजी घोड़ा तेजी से दौड़कर अरपा-भैंसाझार परियोजना के चकरभाठा वितरक नहर का अवार्ड पत्रक भू-अर्जन पत्रक-22 (मुआवजा देयक पत्रक) में खसरा नंबर 1/4 अर्जित रकबा 0.03 एकड़ को सिंचित दुफसली/अन्य पहुंच मार्ग के साथ मकान निर्मित बताया जाकर मुआवजा की राशि 37,37,871/- एवं खसरा नंबर 1/6 अर्जित रकबा 0.26 एकड़ भूमि के विरूद्ध मुआवजा की राशि 3,04,80,049/ मनोज अग्रवाल पिता पवन अग्रवाल प्रेमी को भुगतान किया गया है। जांच में पाया गया कि साहू ने पटवारी हल्का नंबर 45 सकरी में पदस्थ रहते हुए भू-अर्जन प्रकरण में भारी अनियमितताएं की है। जुलाई 2021 की प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलीं थी इसके बाद उन्हें शो कॉज नोटिस दिया गया था। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था। जनवरी 2025 के जांच प्रतिवेदन में आरोप प्रमाणित होने पर संचालक भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ ने साहू को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। विभागीय जांच में सिद्ध हुआ कि साहू के कार्यों से शासन को 3 करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपए की आर्थिक क्षति हुई और पवन अग्रवाल को इतनी ही राशि का लाभ हुआ। 8 साल की कानूनी लड़ाई के बाद यह मामला अभी आंशिक निष्कर्ष तक पहुंचा है। अभी इस मामले में मुआवजा राशि की रिकवरी के अलावा और भी अन्य मामले है जिनपर कार्रवाई अभी बाकी है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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