रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन में करोड़ों रुपए के रीएजेंट खरीद घोटाले में देर रात ईओडब्लू ने पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारियों में सीजीएमएससी के दो जीएम के अलावा हेल्थ विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अनिल परसाई भी शामिल हैं। मामले में रीएजेंट सप्लायर मोक्षित कार्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा को ईओडब्लू पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन में करोड़ों रुपए के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच तेज कर दी है। ईओडब्लू ने दो आईएएस समेत सीजीएमएससी और हेल्थ विभाग के दर्जन भर अधिकारियों को तलब कर लंबी पूछताछ की थी। इसके बाद ईओडब्लू ने बीती रात वसंत कौशिक, डॉ. अनिल परसाई, शिरौंद्र रावटिया, कमलकांत पाटनवार और दीपक बांधे को गिरफ्तार कर लिया है। देर रात गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को ईओडब्लू कोर्ट में सभी को पेश किया गया। जहां से सभी को 28 मार्च तक रिमांड में भेज दिया गया है। आपको बता दे कि कांग्रेस शासनकाल में स्वास्थ्य विभाग के सीजीएमएससीएल ने मोक्षित कॉरपोरेशन के माध्यम से करोड़ों रुपए का घोटाला किया है।सीजीएमएससीएल ने मोक्षित कॉरपोरेशन से 660 करोड़ रुपये के उपकरण और सर्जिकल आइटम खरीद लिए। CGMSC के अधिकारी, मोक्षित कार्पोरेशन, रिकॉर्ड्स और मेडिकेयर सिस्टम, श्री शारदा इंडस्ट्रीज और सीबी कार्पोरेशन ने 8 रुपए में मिलने वाला EDTA ट्यूब 2,352 रुपए और 5 लाख वाली CBS मशीन 17 लाख में खरीदी। मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने 300 करोड़ रुपए के रीएजेंट भी खरीदे थे। अधिकारियों ने एक महीने के अंदर लगभग 800 करोड़ रुपए की सामग्री खरीदी और भुगतान भी कर दिया। इसको लेकर भारतीय लेखा एंव लेखापरीक्षा विभाग के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट) आईएएस यशवंत कुमार ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार पिंगुआ को पत्र लिखा था। लेखा परीक्षा की टीम की ओर से की गई जांच में पाया गया कि वित्त वर्ष 2022-24 और 2023-24 के दौरान कंपनी ने बिना बजट आवंटन के 660 करोड़ रुपये की खरीद की थी। ऑडिट में पाया गया है कि पिछले दो सालों के अंदर आवश्यकता से ज्यादा केमिकल और मेडिकल उपकरण खरीदे गए। इसके बाद उसे खपाने के लिए नियम कानून को भी दरकिनार कर दिया गया।
प्रदेश के 776 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में दावा और उपकरण की सप्लाई की जाती है। जिनमें से 350 से अधिक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं, जिसमें कोई तकनीकी, जनशक्ति और भंडारण सुविधा उपलब्ध ही नहीं थी। ऑडिट टीम के अनुसार DHS ने स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाओं में बेसलाइन सर्वेक्षण और अंतर विश्लेषण किए बिना ही उपकरणों और रीएजेंट मांग पत्र जारी किया था।
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