ये तस्वीर कुछ कह रहा है… नहीं नहीं बहुत कुछ कह रहा है…., सब राजनीति का खेला है 😆😆😆, न बुझ सको तो खबर पढ़ लीजिए…, शायद कुछ हिंट मिल जाए…

बिलासपुर। तस्वीरें हमेशा कुछ कहती है और कुछ तस्वीरें तो बहुत कुछ कहती है और विस्फोटक भी होती है। यदि राजनीति से जुड़े लोगों की हो तो भूचाल लाने के लिए पर्याप्त है। ऐसी ही एक तस्वीर democrecy.in के हाथ लगी है। लगी क्या है ..? घुमा – फिरा के हम तक पहुंचाई गई है। दरअसल तस्वीर है बिल्हा विधायक धरम लाल कौशिक के परसदा स्थित बंगले की…, जहां उनसे मिलने जुलने वालों की लाइन लगी है। हालांकि तस्वीर को लेकर कई तरह की चर्चा है। कुछ लोग इसे बंगले की बता रहे है, जबकि राजेंद्र शुक्ला इसे जिला पंचायत की बता रहे है। लेकिन जिला पंचायत भवन की नहीं है। हो सकता है ये उस मतगणना स्थल की हो जान जिला पंचायत चुनाव की मतगणना की गई हो। इसी लाइन में कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष और बिल्हा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे राजेंद्र शुक्ला भी नजर आ रहे है। राजेंद्र शुक्ला के साथ उनकी धर्म पत्नी श्रीमती अनीता शुक्ला भी है। जो अभी अभी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर जिला पंचायत सदस्य बनी है, और श्री कौशिक से शिष्टाचारवश अभिवादन करके आशीर्वाद ले रहीं है। वैसे अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेना कोई अपराध नहीं है। जब भी अवसर मिले सभी को ले लेना चाहिए। बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने से पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है। फिर संस्कार नाम की भी तो कोई चीज होती है। लेकिन दो धुर विरोधी पार्टियों के नेता जब इस तरह से मेल मुलाकात करते है तो उस क्षेत्र में आग तो लगती है, आग लगी भी है। आग भाजपा और कांग्रेस दोनो तरफ लगी है। भाजपा के नेताओं में भी और कांग्रेस के नेताओं में भी। श्री कौशिक के करीबियों में भी लगी है और कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी लगी है। अब आग क्यों लगी है …? कारण सबके अलग अलग है। कौशिक के करीबियों को इस नजदीकी में अपना नुकसान नजर आ रहा है ? तो कांग्रेस के कार्यकर्ता इस उधेड़बुन में लग गए है कि उनके सारे जनपद सदस्य हारे कैसे ? जबकि उसी क्षेत्र और उन्हीं गांवों से अनीता भाभी को जबरदस्त लीड मिली है ! जी हां आपको बता दे जिस जिला पंचायत क्षेत्र से राजेंद्र शुक्ला की धर्म पत्नी श्रीमती अनीता शुक्ला कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीती है उस क्षेत्र में 6 जनपद सदस्य का क्षेत्र भी आता है। इन सभी क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रत्याशी हार गए है और भाजपा के जनपद सदस्यों की जीत हुई है। कांग्रेस का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया। राजनीति में गुणाभाग कैसे होता है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि जिस अनीता शुक्ला के खिलाफ भाजपा ने पुनीता डहरिया को टिकट दिया था वह चुनाव प्रचार के लिए अपने घर से नहीं निकली, और तो और किसी गांव में भाजपा प्रत्याशी पुनीता डहरिया का बैनर पोस्टर तक नजर नहीं आया। क्षेत्र में इस बात की चर्चा है कि श्रीमती अनीता शुक्ला को चुनाव जिताने के लिए पुनीता डहरिया को घर में बैठा दिया गया था। यही कारण है कि जिस क्षेत्र से भाजपा के जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी को करारी हार मिली उसी क्षेत्र से भाजपा के सभी 6 जनपद पंचायत सदस्य चुनाव जीतकर कैसे आ गए ? भाजपा के जो 6 जनपद सदस्य चुनाव जीतकर आए है उनमें भोजपुरी क्षेत्र से राधिका जितेन्द्र जोगी (sc बीजेपी ), धौराभाठा क्षेत्र से सरस्वती मनोज यादव (बीजेपी सामान्य महिला महिला), रहँगी क्षेत्र से (obc रजनी लव श्रीवास बीजेपी), सेवार क्षेत्र से नरेंद्र साहू निर्दलीय वर्तमान बीजेपी अनारक्षित, दगोरी क्षेत्र से राजकुमार साहू अनारक्षित और तेलसरा क्षेत्र से श्याम लाल बर्मन (sc बीजेपी) शामिल है। फिलहाल बात राजेंद्र शुक्ला और उनकी धर्म पत्नी अनिता शुक्ला की हो रही है। इस तस्वीर को देखकर कांग्रेस के सदस्य एक दूसरे से पूछ रहे है कि ये रिश्ता क्या कहलाता है ? क्या भविष्य में बिल्हा का राजनीतिक समीकरण बदलने वाली है ? या कांग्रेस के जो जनपद पंचायत के प्रत्याशी है उनके साथ धोखा हुआ है ? वैसे राजनीति में उठापटक सामान्य बात है। खुद को जिताने के लिए नेता छोटे कार्यकर्ताओं की बलि देते रहे है। नेताओं को एक दूसरे साथ मधुर संबंध रखने चाहिए। आखिर नेता एक दूसरे के काम नहीं आएंगे तो कौन आएगा ? पार्टी के छोटे कार्यकर्ताओं को भी संबंध निभाने के मामले में अपने नेताओं का अनुसरण करना चाहिए। इससे क्षेत्र में आपसी भाई चारा बनी रहती है। चारा भी सबमें बांटता रहता है। फिलहाल बवाल तो मचा हुआ है। कोई किसी के खिलाफ शिकायत ऐसे ही नहीं करता। कुछ तो बात होगी ?

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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