रायपुर। EOW की टिम ने SDM, तहसीलदार, RI और पटवारी समेत कई राजस्व अधिकारियों के यहां छापामार कार्रवाई की है। यह कार्रवाई भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की शिकायत पर की गई है। इस मामले में एक SDM और तहसीलदार पहले ही सस्पेंड हो छूटे है। शिकायत के अनुसार अधिकारियों ने बैंक डेट में फर्जी दस्तावेज तैयार करके 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का फर्जी मुआवजा वितरण किया है।
छत्तीसगढ़ में 300 करोड़ से ज्यादा के भारतमाला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण के बाद हुए मुआवजा घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। 324 करोड़ के मुआवजा घोटाले को लेकर पूरे प्रदेश में EOW की बड़ी कार्रवाई चल रही है। प्रदेश की राजधानी रायपुर, नया रायपुर, दुर्ग-भिलाई, अभनपुर, आरंग और बिलासपुर जैसे जिलों में कई प्रशासनिक और बैंक अधिकारियों के निवास व कार्यालयों पर जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार जांच के दायरे में वर्तमान और पूर्व SDM, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी और RI के साथ बैंक मैनेजर शामिल हैं। भिलाई में ACB ने एक बैंक मैनेजर के घर पर छापा मारा है जहां उसके परिजनों से पूछताछ की जा रही है और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का ब्यौरा लिया जा रहा है। बैंक मैनेजर से भी लगातार पूछताछ की जा रही है।
बिलासपुर में अतिरिक्त तहसीलदार लखेश्वर ध्रुव के आवास पर ACB की टीम पहुंची है। यहां छह से अधिक अधिकारी दस्तावेजों की जांच में जुटे हुए हैं। ध्रुव पहले रायपुर में नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत थे और वर्तमान में बिलासपुर में पदस्थ हैं। रायपुर में तात्कालिक SDM निर्भय साहू और तहसीलदार शशिकांत कुर्रे के घरों पर भी छापेमारी की गई है। EOW की टीम इन अधिकारियों से जुड़ी संपत्तियों और लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि भारतमाला प्रोजेक्ट में सामने आए कथित मुआवजा घोटाले को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर शिकायत की थी। पीएमओ ने महंत की शिकायत को गंभीरता से लिया है।
00। जानिए क्या है पूरा मामला
भारत माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया ने सिंडिकेट बनाकर बैक डेट दस्तावेज तैयारकर घोटाले को अंजाम दिया है। रायपुर-विशाखापट्टनम तक भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत 6 लेन सड़क बन रही है। मुआवजा में घोटाले की खबर मीडिया में छपने के बाद कोरबा के डिप्टी कलेक्टर ने शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था। निर्भय कुमार साहू सहित पांच अधिकारी–कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक राशि की गड़बड़ी का आरोप है।
अवर सचिव के निर्देश पर बनी जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है, कि अभनपुर इलाके में पदस्थ अधिकारियों ने बैक डेट में जाकर दस्तावेज तैयार किए और गड़बड़ी को अंजाम दिया। असली जमीन मालिक को नुकसान पहुंचाया। इसका खुलासा इस बात से अफसरों ने किया कि अभनपुर के ग्राम नायक बांधा और उरला में चार एकड़ जमीन जो सर्वे से पहले एक परिवार के पास थी। वो सर्वे होने के ठीक कुछ दिन पहले एक ही परिवार के 14 लोगों के नाम पर बांट दी गई। इसके बाद एक ही परिवार के सदस्यों को 70 करोड़ रुपए की मुआवजा का भुगतान कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने तत्कालीन अफसरों की इस कार्यप्रणाली का सीधा जिक्र अपनी जांच रिपोर्ट में किया है।
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