नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ी जंग, 300 नक्सलियों को 10 हजार जवानों ने घेरा, हिडमा, देवा और दामोदर का खात्मा तय

बिलासपुर। नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ी जंग पिछले पांच दिन से जारी है। सुरक्षाबल के 10 हजार जवानों ने 300 नक्सलियों को चारों तरफ से घेर रखा है। इस जंग में हिडमा, देवा और दामोदर जैसे बड़े नक्सली लीडरों का खात्मा तय हो चुका है। पहली बार हेलिकॉप्टर और ड्रोन से जवान हमले कर रहे है। घबराए नक्सली संगठन ने सरकार के सामने शांति का प्रस्ताव रखा है। लेकिन सरकार आरपार की लड़ाई के मूड में आ चुकी है।

सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ आज 6 वें दिन भी जारी है। यह जंग छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा में चल रहा है। कर्रेगुट्टा, नाडपल्ली और पुजारी कांकेर की पहाड़ियों में चल रहे इस मुठभेड़ में हिड़मा, देवा और दामोदर समेत 300 से ज्यादा नक्सली घिरे हुए है। नक्सलियों के भागने के लिए कोई जगह नहीं है लिहाजा माना जा रहा है कि ये सभी मुठभेड़ में मारे जाएंगे या फिर इन्हें सरेंडर करना पड़ेगा। क्योंकि तीनों राज्य के 10 हजार से अधिक जवान चारों तरफ से घेरकर आगे बढ़ गए है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि जवान पहाड़ी पर चढ़ चुके है। इस मुठभेड़ में पहली बार दो हेलीकाफ्टरों के अलावा दर्जनों ड्रोन कैमरे का सहारा लिया जा रहा है। नक्सलियों पर हेलीकाफ्टर से नक्सलियों पर गोलीबारी और बमबारी की जा रही है। 5 दिन से चल रही इस मुठभेड़ में जवानों ने 5 नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें से 3 के शव हथियार समेत बरामद हुए हैं। आज 6वें दिन भी लगातार दोनों तरफ से रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। हालांकि इस भीषण गर्मी के कारण सुरक्षबल के लगभग 40 जवान भी लू की चपेट में आ गए है।  बताया जा रहा है कि जिस इलाके में मुठभेड़ चल रही है उस इलाके में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1, 2, समेत कई अन्य कंपनियां सक्रिय हैं। टॉप लीडर हिड़मा, देवा, दामोदर, विकास समेत आंध्र-तेलंगाना-महाराष्ट्र के सेंट्रल कमेटी, DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी), DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर), ACM (एरिया कमेटी मेंबर), संगठन सचिव जैसे बड़े केडर के नक्सली भी यहां मौजूद हैं।

सुरक्षाबलों के इस घेराबंदी से नक्सलियों में भगदड़ की स्थिति बन गई है। टॉप लीडरों के घिरने से दहशत फैल गया है। यही कारण है कि नक्सली संगठनों की ओर से सरकार के पास शांति प्रस्ताव पहुंच रहा है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश की ओर से जारी पत्र में सबसे पहले बीजापुर-तेलंगाना सीमा पर तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तैनात सुरक्षाबल की संयुक्त कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग करते हुए सरकार से शांति वार्ता के लिए आगे आने की अपील की है। ब्यूरो के चिट्ठी में रूपेश ने साफ तौर पर कहा है कि बस्तर में बंदूक के दम पर शांति नहीं लाई जा सकती। उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही शांति वार्ता के लिए माहौल बनाने की मांग की थी, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। चिट्ठी में हाल ही में शुरू हुए कागार ऑपरेशन का भी जिक्र किया गया है, जिस पर रूपेश ने लिखा है कि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की संयुक्त कार्रवाई वार्ता के माहौल को नुकसान पहुंचा रही है।
इसके साथ उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एक ओर बातचीत की बात होती है, तो दूसरी ओर जंगलों में फोर्स भेज दी जाती है। दावा है कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और ही दिख रही है। अंत में लिखा गया है कि वे सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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