कलेक्टर ने कृषि अधिकारियों से कहा धान की पुरानी किस्म के बीजों को रिप्लेस करें, नई किस्म के बीजों को उपलब्ध कराएं

बिलासपुर। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने प्रार्थना सभाकक्ष में कृषि और इनसे जुड़े विभागों के कामकाज की समीक्षा की और खाद, बीज की अग्रिम उठाव कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान अब खरीफ फसलों की तैयारी शुरू कर दिए हैं। समितियों और बैंकों में खाद बीज और लोन उठाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होने चाहिए। उन्होंने समिति स्तर पर शिविर आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काफी सोच समझकर किसानों को सलाह दें। आपकी सलाह उनके लिए नुकसान का सौदा नहीं होने चाहिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, उप संचालक कृषि पीडी हथेस्वर सहित फील्ड स्तर के अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने कहा की 10 साल से ज्यादा अवधि के धान बीजों के किस्मों को रिप्लेस करना है। स्वर्णा, महामाया, राजेश्वरी, एमटीयू 1010, एमटीयू 1001 इस कैटेगरी में आते हैं। इनकी जगह दस साल से कम अवधि की किस्मों को प्राथमिकता देना हैं। जिनमें एमटीयू 1156, 1153,1318, विक्रम टीसीआर शामिल हैं। इनकी पर्याप्त मात्रा में बीज सभी विकासखंडों में उपलब्ध हैं। कलेक्टर ने सभी आरएईओ से गांव – गांव में गोष्ठी कर किसानों को समझाइश देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तुलनात्मक रूप से समझाएं कि उनके लिए क्या फायदा है। प्रयास करें कि उतने ही लागत में धान से ज्यादा फायदा अन्य फसलों में हो सकता है। कलेक्टर ने कहा कि पहले किसानों की दिक्कतें सुने और समझें उनके अनुरूप उन्हें निदान बताएं। उन्होंने कहा कि किसानों को समूह बनाकर शासन की योजनाओं का लाभ दिलाए। एक-एक दो-दो किसानों को लाभ दिलाने से इसके प्रबंधन में दिक्कत आती है। हॉर्टिकल्चर विभाग की समीक्षा करते हुए फसल विविधता पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि हॉर्टिकल्चर क्रॉप में रिस्क अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर न होकर कई फसल एक साथ लगाएं। श्री अग्रवाल ने कहा कि एक बार जो हॉर्टिकल्चर क्रॉप का लाभ ले लेता है वह वापस धान फसल की ओर नहीं आएगा।
कलेक्टर ने कहा कि किसानों का व्यवहार परिवर्तन थोड़ा कठिन जरूर है, इसमें समय लगता है, हमें थकना नहीं है और ना ही हार मानना है। उन्होंने कहा कि हर किसान का केसीसी कार्ड होना चाहिए । उन्होंने कहा कि केसीसी योजना से जो किसान छूट गए हैं, उनसे व्यक्तिगत संपर्क कर इसका लाभ दिलाए। न केवल फसल बल्कि मछलीपालन, डेयरी, पोल्ट्री वालों को भी केसीसी कार्ड इशू होना चाहिए। उन्होंने बैठक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत एक विस्तृत कार्य योजना बनाने की निर्देश दिए। आपने कहा कि जिले में कई पुराने खदान हैं जिनमें वर्ष भर पानी भरा होता है । इन खदानों में मछली पालन किया जा सकता है। कलेक्टर ने कहा कि पीएम किसान सम्मान योजना के अंतर्गत लगभग 10000 किसान आज की तारीख में छुटे हुए हैं। इन सभी को एक-दो महीने में सम्मान निधि योजना से जोड़कर लाभ दिलाए। उन्हें एल साल में तीन किस्तों में ₹6000 कृषि कार्य में मदद के लिए दिया जाता है।
पटेल/

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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