रायपुर। शासन के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के आगे बढ़ते ही शिक्षा विभाग व शिक्षक संघ के बीच तकरार बढ़ता हुआ दिख रहा है। एक ओर शिक्षा विभाग की ओर से युक्तियुक्तकरण को संतुलित व गुणवत्ता पूर्ण बताया जा रहा है तो शिक्षक टीचर्स एसोसिएशन ने युक्तियुक्तकरण को शिक्षा की गुणवत्ता से खिलवाड़ व शासकीय शाला को कमजोर करने का प्रयास बताते हुए शासन से कई सवाल करते हुए छात्र, पालक व शिक्षकों का पक्ष रखा है।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा एवं ब्लॉक अध्यक्ष हरीश दीवान ने सयुक्त रूप से कहा है कि 2008 के सेटअप के अनुसार प्रायमरी स्कूलों में न्यूनतम एक प्रधान पाठक और दो शिक्षक 1+2 का प्रावधान है और मिडिल स्कूलों में एक प्रधान पाठक और 4 शिक्षक 1+4 का प्रावधान है। युक्तियुक्तकरण में एक एक पद कम करके इसे 1+1 और 1+3 कर दिया गया है। प्रदेश में 30700 प्राथमिक शाला संचालित है जहाँ 1 सहायक शिक्षक पद कम कर 30700 पद व 13149 पूर्व माध्यमिक शाला संचालित है जहाँ शिक्षक का 1 पद कम कर 13149 पद, कुल इससे 43849 पद एक झटके में समाप्त हो गए और यही शिक्षक अब अतिशेष बनाये जा रहे है।
00 स्कूल में अतिशेष हुए क्यो शिक्षक -?
कागजी आंकड़े को लेकर शिक्षा विभाग हर बार शिक्षकों को पैमाना में कसने का प्रयास करता है। किंतु स्थानांतरण व पदोन्नति के समय सारे नियम तोड़कर “जहाँ पाओ वहाँ पोस्टिंग करो” की नीति अपनाते है। जिससे स्कूल में शिक्षक अतिशेष हो जाते है, अतिशेष की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
00 2 शिक्षक 18 पीरियड कैसे पढ़ाएंगे ?
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश सोनकला, ब्लॉक अध्यक्ष हरीश दीवान प्रदेश मंत्री, जितेन्द्र मिश्रा, प्रफुल्ल माँझी, इंद्रजीत वर्मा, मनोज मुछावड़, रुद्र नारायण तिवारी, अभिषेक तिवारी, मौसमी शर्मा, कनकलता गहलौत, अंजली परिहार, अनिता सिंह, नीता साहू, रवि शर्मा ने कहा है कि जरा सोचकर देंखे शिक्षाविद व शिक्षा विभाग प्रायमरी स्कूलों में कम से कम 5 शिक्षक होना चाहिए। यह इसीलिए जरूरी है क्योंकि वहाँ क्लास 1 से लेकर 5 वी कक्षा तक पढ़ाने के 18 पीरियड चाहिए, क्या 2 शिक्षक 18 पीरियड पढ़ाएंगे ? क्या एक दिन में स्कूली समय मे 9 पीरियड होंगे ? शिक्षकों से यह जबरदस्ती क्यो ? इस प्रकार के युक्तियुक्तकरण से क्या शिक्षा का गुणवत्ता बढ़ जाएगा ? क्या शासकीय स्कूल कमजोर नहीं होंगे ? क्या शासन चाहती है कि पढ़ाई न होने से छात्र शासकीय स्कूल छोड़कर निजी स्कूल में प्रवेश लें ?
00 कामर्स 6 कालखंड में 1 व्याख्याता कैसे ?
कामर्स में 3 विषय के आधार पर कक्षा 11 वी व 12 वी में कुल 6 कालखड़ के लिए 1 व्याख्याता की व्यवस्था कहां तक उचित है ? क्या एक व्याख्याता कुछ 6 पीरियड निरन्तर अध्यापन कर सकता है ?
00 43243 शिक्षक पद रिक्त
संघ के पदाधिकारियों ने कहा है कि 31 जनवरी 2025 में शिक्षा विभाग द्वारा बताया गया है कि सहायक शिक्षक के 33178 पद, शिक्षक के 5442 पद व व्याख्याता के 4623 पद, कुल 43243 पद रिक्त है। स्वाभाविक रूप से यह पद सेटअप के अनुसार ही रिक्त है। फिर शासन सेटअप का पालन क्यो नही कर रही है ? क्या रिक्त पदों में योग्य प्रशिक्षित बेरोजगारों के भर्ती के खिलाफ है ? क्या सरकार डीएड, बीएड, टेट योग्यताधारी बेरोजगारों को नौकरी से वंचित करना चाहती है।
00 शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय शाला क्यो है ?
गत डेढ़ वर्ष पहले प्राथमिक शाला में 3 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती हुई थी। प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में पदोन्नति भी की गई। फिर भी 212 प्राथमिक शाला शिक्षक विहीन क्यो है ? 6872 प्राथमिक शाला एकल शिक्षकीय क्यो है ? क्यो 48 पूर्व माध्यमिक शाला शिक्षक विहीन है ? और क्यो 255 पूर्व माध्यमिक शाला एकल शिक्षकीय है ? जबकि शिक्षा विभाग ने शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय शाला में पहले पोस्टिंग का आदेश दिया था, इसके लिए शिक्षा विभाग जिम्मेदारी तय करे।
00 ड्राप आउट का कारण अलग
एक ही परिसर व आश्रित शाला से छात्रो को शत प्रतिशत प्रवेश लेने के लिए शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है। जिसके तहत सम्बन्धित छात्रों को निरन्तर प्रवेशित माना जाता है, उन्हें पुनः प्रवेश लेने की आवश्यकता नही है। बच्चो के ड्रॉपआउट होने के कारण में उनके पालक का अन्यत्र जाना, शिक्षा को प्राथमिकता नही दे पाना और स्किल शिक्षा का पर्याप्त अवसर न मिलना प्रमुख है।
00 शिक्षक संगठन है विरोध में
2008 के सेटअप से छात्र, पालक व शिक्षक के बीच शिक्षा गुणवत्ता का अनुकूलन होगा अतः सेटअप का पालन विभाग को करना ही होगा। क्योंकि सेटअप विभाग के साथ साथ शाला का आधारभूत रीढ़ होता है। इससे हटकर की जा रही युक्तियुक्तकरण का प्रदेश भर के शिक्षक व शिक्षक संगठन विरोध करते है। इसके लिए शिक्षकों का एक साझा मंच 14 मई की बैठक में बनाया गया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन उसमे सहभागी है। एसोसिएशन की ओर से प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, योगेश सिंह ठाकुर व जितेंद्र मिश्रा भी बैठक में शामिल थे। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। सभी ने मिलकर एक स्वर में यह तय किया था कि युक्तियुक्तकरण रद्द करने, सोना साहू के तर्ज पर प्रदेश के सभी पात्र शिक्षकों को एरियर्स सहित क्रमोन्नति वेतनमान देने के लिए जनरल आर्डर जारी करने, पूर्व सेवा (प्रथम सेवा) गणना कर पेंशन सहित समस्त लाभ देने एवं प्राचार्य व व्याख्याता पदोन्नति में बीएड की अनिवार्यता समाप्त कर डीएड/बीएड प्रशिक्षित दोनों को शामिल करने की मांगों में सभी की सहमति है। अब इसके लिए 20 मई 2025 को मंत्रालय महानदी भवन परिसर में एकत्रित होकर विभाग में विरोध करेंगे।
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