बिलासपुर। स्वास्थ विभाग के संभागीय और CMHO कार्यालय भर्राशाही के शिकार होकर रह गया है। यहां अधिकारियों का अपना नियम कानून चल रहा है। जिन डॉक्टरों को हेल्थ सेंटर बैठने चाहिए उन्हें कार्यालय में अधिकारी बनाकर बैठा दिया है। मामला मोहल्लों में खोले गए हेल्थ सेंटरों की है। शासन ने बिलासपुर के शहरी क्षेत्र के मोहल्लों में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए आयुष्मान हेल्थ सेंटर खोलते हुए सेवानिवृत चिकित्सकों की संविदा नियुक्ति की है। इन डॉक्टरों को मोहल्ला के क्लिनिक में बैठ कर मरीजों का उपचार करना है। लेकिन CMHO द्वारा मोहल्ले के नागरिकों को मिलने वाली उपचार सुविधा से वंचित करते हुए समता कालोनी हेल्थ सेंटर में पदस्थ डॉक्टर मनोज सैमुवल को जिला कार्यालय नोडल ऑफिसर बना कर बैठाया गया है। जबकि शंकर नगर हेल्थ सेंटर में पदस्थ डॉक्टर प्रभात श्रीवास्तव को सिम्स में संलग्न कर दिया गया है। जबकि CMHO या कलेक्टर को ये अधिकार नहीं है कि हेल्थ सेंटरों में संविदा पर पदस्थ डॉक्टरों को सिम्स में संलग्न कर सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की लापरवाही की वजह से जहां आम नागरिकों को चिकित्सा सुविधा से वंचित किया जा रहा है। यही नहीं नियम कानून की भी धज्जियां उड़ रही है। स्वास्थ अधिकारियों की मनमानी के कारण ही बिलासपुर जिला स्वास्थ सुविधाएं मुहैया कराने के मामले 33 वें स्थान पर है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम भी धरातल तक नहीं पहुंच पा रहा है। अधिकारी केवल कागजों में आंकड़े दिखाकर मंत्रालय अधिकारियों को मूर्ख बनाया जा रहा है। विडंबना ये है कि मंत्रालय स्तर के अधिकारी भी AC चेंबर में मीटिंग लेकर और कागजी आंकड़े देखकर खुश है।
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