बिलासपुर। तेंदूपत्ता बोनस घोटाले में ACB/EOW ने वन विभाग के 4 कर्मचारियों और 7 समिति प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को दंतेवाड़ा जिला न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
सुकमा के DFO अशोक कुमार पटेल ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए करोड़ो रुपए के तेंदूपत्ता बोनस घोटाले को अंजाम दिया था। इस घोटाले में कई लघुवनोपज समिति के प्रबंधक और पोषक अधिकारी भी शामिल है। सभी ने एक साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से घोटाले को अंजाम दिया था। वर्ष 2021 एवं वर्ष 2022 के सीजन में हुए इस तेंदुपत्ता बोनस घोटाले में श्रमिकों को दी जाने वाली बोनस को फर्जीवाड़ा कर आपस में बांट लिए थे। बोनस की यह राशि 7 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। घोटाला सामने आने पर EOW ने धारा-409, 120बी भादवि के तहत दिनांक 08.04.2025 जुर्म दर्ज किया था। इसके बाद हुए विवेचना में साक्ष्य पाये जाने पर 04 वनकर्मी (03 उप वनक्षेत्रपाल एवं 01 वनरक्षक) चैतूराम बघेल, देवनाथ भारद्वाज, पोड़ियामी इड़िमा (हिडमा), मनीष कुमार बारसे, वनरक्षक और 07 प्रबंधक-पायम सत्यनारायण उर्फ शत्रु, मो. शरीफ, सी.एच. रमना (चिदूरी), सुनील नुप्पो, रवि कुमार गुप्ता, आयतू कोरसा एवं मनोज कवासी को EOW ने गिरफ्तार किया है। रायपुर। राज्य में तेंदूपत्ता संग्राहकों की बोनस राशि में हुई व्यापक अनियमितताओं को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 वन विभाग के कर्मचारी और 7 समिति प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को दंतेवाड़ा जिला न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
तेंदूपत्ता बोनस वितरण में गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वन मंत्री केदार कश्यप ने जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सामने आया कि सुकमा वनमंडल के कोंटा, किस्टाराम और गोलापल्ली परिक्षेत्र में संग्राहकों को दो वर्षों का बोनस मिलना था। लेकिन उन्हें सिर्फ एक साल का दिया गया। वह भी अधूरा भुगतान किया गया। इसके अलावा कई फर्जी नामों और मृत व्यक्तियों के नाम पर भी बोनस उठाया गया।
जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम के अनुसार वर्ष 2021 और 2022 के लिए बोनस देने के लिए 6.54 करोड़ रुपए सुकमा वनमंडल को मिले। यह राशि लगभग 66,000 संग्राहकों को दी जानी थी। लेकिन प्रबंधकों ने अप्रैल में ही पूरी राशि निकाल ली और अगले 8 महीनों तक संग्राहकों को कोई भुगतान नहीं किया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र का हवाला देकर अधिकारियों ने ₹3.62 करोड़ की नकद वितरण की अनुमति ली, लेकिन वह राशि भी वितरित नहीं की गई।
जांच के बाद 11 समितियों के प्रबंधकों को पद से हटाया गया और संचालक मंडलों को भंग कर दिया गया है। जबकि सुकमा के वनमंडलाधिकारी को सरकार ने निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी भी की गई है।
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