जशपुर। विशेष न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 07 के तहत दोषी पाए हुए तहसीलदार कमलेश कुमार मिरि को 3 साल का सश्रम कारावास की सजा दी है। कोर्ट ने पचास हजार रुपए का अर्थदंड भी दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार 2020 में नायब तहसीलदार कमलेश कुमार मिरि तहसील कार्यालय जशपुर में प्रभारी तहसीलदार के रूप में पदस्थ थे। तब मिरि ने मनोज कुमार गुप्ता से ग्राम बालाछापर में खरीदी गई भूमि के नामांतरण, प्रमाणीकरण और ऋण पुस्तिका में हस्ताक्षर करने के लिए 3 लाख रुपए रिश्वत की मांग की थी। मनोज गुप्ता ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो अंबिकापुर में कर दी थी।
ACB अंबिकापुर की टीम ने प्रारंभिक जांच में शिकायत को सही पाए जाने पर एक सूक्ष्म योजना बनाई। योजना के तहत प्रार्थी अनोज गुप्ता को 50,000 रुपए की पहली किस्त के साथ 19 अगस्त 2020 को तहसीलदार के पास भेजा। जैसे ही नायब तहसीलदार कमलेश मिरी ने यह रकम अपने हाथों में लिया एसीबी की टीम ने तहसील कार्यालय में छापा मारकर उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया। स्पेशल कोर्ट में विधिवत सुनवाई शुरू हुई। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम जशपुर सत्येन्द्र कुमार साहू की अदालत में की गई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक सीपी सिंह ने मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिनमें रिश्वत की रकम की बरामदगी, प्राथमिक शिकायत, एसीबी की कार्यवाही रिपोर्ट एवं रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट शामिल थीं।
आखिरकार 30 जून को न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी कमलेश मिरी को दोषी मानते हुए 3 वर्ष की सश्रम कारावास और 50,000 रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया है। न्यायालय ने माना है कि आरोपी तहसीलदार ने प्रार्थी अनोज गुप्ता द्वारा जमीन की रजिस्ट्री पूरी होने के बाद जब नामांतरण की प्रक्रिया के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया तो अधिकारी ने सरकारी कर्तव्य निभाने के बदले में निजी लाभ की मांग की है।
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