बिलासपुर। रायपुर रोड स्थित रामा वैली रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी के सचिव पीव्हीआर नायडू, उपाध्यक्ष सी पी शर्मा, मनोज गर्ग, शोभन दत्ता ने सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा की और बताया कि रामावैली कॉलोनी के विकास एवं निर्माण मे भारी अनियमितता है। इसके निराकरण के लिए समिति चाहती है कि पूरी कॉलोनी का एक बार सीमांकन किया जाए, ताकि कॉलोनी में हुए अनियमितता और गड़बड़ी सामने आ सके। समिति का आरोप है कि बिल्डर ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के स्वीकृत नक्शे के विरुद्ध कई गड़बड़ियां की है, जैसे कॉलोनी के ग्रीनलैंड में व्यावसायिक परिसर बना दिया गया है। व्यावसायिक परिसर की जगह को बेच दिया गया है। कॉलोनी मे कोटवार को आबंटित शासकीय भूमि 0.943 एकड़ है जो कि बैंक मे बंधक रखा गया है। जिसमे से 19200 स्क्वेयर फिट भूमि को बिल्डर प्रकाश ग्वालानी ने बी 1 खसरा मे अपने नाम दर्ज करवा लिया है। कॉलोनी के बीच में 57, 285 स्क्वेयर फिट मे 5000 X4 =20,000 sqft मे 4 (चार )गार्डन निर्मित किए गए हैं, और शेष बचे लगभग 37,000 स्क्वेयर फिट ग्रीन लैंड (पार्क) की भूमि मे अवैध व्यवसायिक परिसर और पार्किंग बनाकर बेच दिया गया। कॉलोनी के 32646 स्क्वेयर फिट ग्रीन लैंड (पार्क) की भूमी मे से करीब 12,000 स्क्वेयर फिट मे रूप से अवैध क्लब का निर्माण कर दिया गया है। खसरा NO.10 से लगा हुआ पूर्व और दक्षिण मे खसरा NO.55 है जिसका रकबा 1,007 हेक्टर और खसरा NO. 56 जिसका रकबा 4.684 हेक्टर है। राजस्व रिकॉर्ड मे यह जमीन शासकीय भूमि और शासकीय तालाब है। कुल रकबा 5.691 हेक्टर यानी 14,063 एकड़ है। जिसे बिल्डर ने हेरा फेरी करके फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर बेच दिया है। इस संबंध में कलेक्टर, निगम आयुक्त, एसडीएम, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों से शिकायत की गई थी जिसके लिए आयुक्त ने एक जांच कमेटी बनाई। जिसकी जांच रिपोर्ट प्रार्थियों को नहीं दी गई। बाद में निगम आयुक्त कार्यालय से प्राप्त जांच प्रतिवेदन में आयुक्त कार्यालय से जो जानकारी दी गई है उसमें राजस्व मामले की जो शिकायत की गई थी उसकी जांच ही नहीं की गई है। उल्टा शिकायतकर्ता को ही जांच रिपोर्ट में गलत बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वहां की दो सोसाइटी में आपसी विवाद, झगड़ा है जिससे कॉलोनाइजर को कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो शॉपिंग मॉल अंदर बनाया गया है जिसमें 32 दुकान तैयार किए गए हैं। उन दुकानों को फावड़ा, गैती और फिनायल रखने की जगह बताई जा रही है जबकि भौतिक स्थिति ऐसी नहीं है।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए समिति के पदाधिकारियो ने कहा कि उनका यह निजी मामला नहीं है और न हीं उनका किसी तरह का कोई विवाद और झगड़ा है। सिर्फ और सिर्फ शासकीय जमीन जो शासन की जमीन है उसे बिल्डर द्वारा बेचा गया है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने जांच को जरूरी बताते हुए हुई गड़बड़ियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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