रायपुर। कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी गई है। स्पेशल कोर्ट ने चैतन्य बघेल को 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया है। ED ने उसे 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई स्थित आवास पर छापेमारी की थी। पांच घंटे की जांच और पूछताछ के बाद चैतन्य बघेल को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तार की बाद ईडी चैतन्य को अपने साथ रायपुर लेकर आई और विशेष कोर्ट में उसे पेश किया। जहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने चैतन्य बघेल को 5 दिन की ईडी की कस्टडी में दे दिया था। पांच दिन तक पूछताछ करने के बाद ED ने आज चैतन्य बघेल को फिर से कोर्ट में पेश किया। यहां बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने कोर्ट को बताचा कि ईडी ने तथ्यों को छिपाकर, असत्य चीजें और डॉक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश किया है। बिना सुनवाई के अवसर दिए धारा 50 के पालन किए बिना और अपना पक्ष रखे बिना ही ईडी ने यह कार्रवाई की है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने चैतन्य बघेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आपको बता दें 22 जुलाई को चैतन्य बघेल की रिमांड पूरी होने से एक दिन पहले ईडी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। जिसमें बताया गया कि शराब घोटाला में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने 16 करोड़ 70 लाख रुपये की अवैध कमाई की है। प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक चैतन्य बघेल ने 16 करोड़ 70 लाख रुपए की अवैध कमाई को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट किया। उन्होंने यह पैसा नकद में ठेकेदारों को भुगतान किया और फर्जी बैंक एंट्री और फ्लैट खरीदी के बहाने से उपयोग किया। ED के अनुसार शराब घोटाले की पूछताछ में शराब कारोबारी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू ने EOW को बयान दिया है कि उसने और चैतन्य बघेल ने मिलकर 1000 करोड़ से ज्यादा घोटाले की रकम को हैंडल किया। यह कैश अनवर ढेबर ने दीपेन चावड़ा को पहुंचाया। यह पैसा बाद में राम गोपाल अग्रवाल को दिया गया। इसकी व्यवस्था चैतन्य बघेल के साथ मिलकर की गई और चैतन्य बघेल के कहने पर 1000 करोड़ में से 100 करोड़ नकद केके श्रीवास्तव को दिया गया। पप्पू बंसल ने पूछताछ में ये भी स्वीकार किया है कि शराब घोटाले से उसे 3 महीने में 136 करोड़ रुपए मिले हैं। अनवर ढेबर और नीतेश पुरोहित के बीच चैट में हुई बातचीत में इसकी जानकारी है।पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई है कि साल 2019 से साल 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का शराब घोटाला हुआ। इस दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि इस पूरे मामले में राज्य के बड़े नेताओं और अधिकारियों का समर्थन था। शराब घोटाला के आरोप में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे कवासी लखमा इस समय जेल में बंद है।
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