कोरबा। SECL के कुसमुंडा खदान में कोयले की अफरा तफरी का मामला सामने आया है। 84 टन अतिरिक्त कोयला के साथ चार ट्रकों को पुलिस ने पकड़ लिया है। कोयले के इस अफरा तफरी में SECL के बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। यदि निष्पक्ष जांच हो तो अरबों का कोयल घोटाला सामने आ सकता है। क्योंकि ये गोरखधंधा सालों से चल रही है।
जानकारी के अनुसार कुसमुंडा कोयला खदान से कई ट्रकों में कोयला लोड कर बाहर निकला। इस दौरान कुसमुंडा खदान प्रबंधन के रोड सेल के अधिकारी औचक निरीक्षण में निकले थे। ट्रकों को देखकर उन्हें शक हुआ कि ट्रकें ओवरलोडेड हैं। जब ट्रकों को रुकवा कर जांच की गई तो चार ट्रकों से 84 टन कोयला अधिक निकला। ओवरलोडेड ट्रकों पर वैधानिक कार्यवाही पूरी करने के बाद इन्हें कुसमुंडा पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। चार ट्रक चालकों पर अलग-अलग धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
अफसरों के मुताबिक चारों ट्रक कोयला लोड कर रात को गुपचुप तरीके से खदान से बाहर निकाला जा रहा था। इनमें कोयला काफी ऊंचाई तक भरा हुआ था। शक होने पर ट्रक को वे ब्रिज में भेजा गया। दोबारा इसका वजन कराया गया, तब एक ट्रेलर में 20 टन अतिरिक्त कोयला मिला। जब सभी ट्रकों का वजन कराया गया तो पता चला कि इन चारों ट्रक में कुल 84 टन कोयला अतिरिक्त कोयला लोड करके परिवहन किया जा रहा है।
इसकी लिखित सूचना कुसमुंडा खदान प्रबंधन ने पुलिस को दी। पुलिस ने चारों वाहनों को जप्त कर लिया है। ट्रक चालकों को भी गिरतार किया गया है। हालांकि इस गड़बड़ी में वेब्रिज में मौजूद स्टाफ और नाके में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है। मगर प्रबंधन ने फ़िलहाल इसकी कोई आशंका नहीं जताई है।
गौरतलब है कि कुसमुंडा खदान से रोज हजारों ट्रक कोयला लेकर बाहर निकलते हैं। यहां प्रबंधन की आंखों में धूल झोंककर लगातार कोयले की अफरा तफरी की जा रही हैं। इस मामले में कुसमुंडा खदान प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने ट्रक क्रमांक सीजी 10 बीटी 2153, सीजी 10 बीटी 3353, सीजी 10 बीटी 2553, और सीजी 10 बीटी 3453 को जप्त किया है। इन चारों वाहनों में कोयला अफरा तफरी के आरोप में पुलिस में मूलचंद जायसवाल, रमेश कुमार कुशवाहा, प्रवेश कुमार जायसवाल और एक अन्य ड्राइवर पर अपराध दर्ज किया गया है। विभागों सूत्रों की माने तो इस गोरखधंधे में SECL के सेल्स डिपार्टमेंट की भूमिका बेहद संदिग्ध है। क्योंकि कुसमुंडा खदान में बिना डीओ कोई बाहरी व्यक्ति घुस नहीं सकता तो बिना अंदरूनी मिलीभगत से यह खेल कैसे चल सकता है। केवल चालकों को आरोपी बना देने से काम नहीं चलेगा। पूरे नेटवर्क को बेनकाब करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें।
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