बिलासपुर। शहर से लगे गुरु गांव का स्कूल घुरुआ बन चुका है। पढ़ने वाले बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे है। भवन जर्जर है, बिल्डिंग के खिड़की और दरवाजे टूट चुके है। यही नहीं इनकी चोरी भी हो चुकी है। बारिश होते ही पूरा कमरा गिला हो जाता है। जिससे बच्चे बैठ के पढ़ाई भी नहीं कर पाते। स्कूल का कैंपस तो बहुत बड़ा है लेकिन मैदान की दुर्दशा देखते ही बन रही है। मैदान में पानी भरते ही खेलना तो दूर चलना भी मुश्किल हो जाता है। एक बार पानी गिरने के बाद हफ्तों तक मैदान में पानी भरा रहता है। जिससे गंदगी, बदबू और मच्छर से बच्चे और शिक्षक सभी परेशान रहते है। इन्हीं गंदगी और बदबू के बीच बच्चे मध्यान्ह भोजन करते है। जर्जर स्कूल को एक चौकीदार की सख्त जरूरत है। लेकिन कई बार मांग करने के बावजूद चौकीदार नहीं दी जा रही है। बच्चों और शिक्षकों का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के लिए एक लिपिक की भी जरूरत स्कूल में है। लेकिन यहां लिपिक नहीं है। जिससे लिपिकीय कार्य भी शिक्षकों को करना पड़ रहा है। स्कूल में शौचालय तक नहीं हैं। जबकि आज के दौर में शौचालय का होना बहुत जरूरी है। पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण कैंपस से बाहर जाकर पानी लाना पड़ता है। बच्चे अपना मध्यान्ह भोजन करने के बाद थाली धोने सड़क पार करके पंप तक जाना पड़ता है। विडंबना तो है कि यहां के जनप्रतिनिधि भी स्कूल के विकास और समस्याओं को लेकर उदासीन है। क्या अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को किसी हादसे का इंतजार है ?
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