रायपुर। धमतरी जिले के कुरूद में SDOP के पद पर पदस्थ रागिनी मिश्रा को स्वतंत्रता दिवस के दिन मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री पुरस्कार’ से सम्मानित किया। उन्हें यह पुरस्कार अनुसूचित जनजाति के प्रकरणों को सुलझाकर सैकड़ों आदिवासियों को राहत पहुंचाने के लिए दिया गया है। राजधानी रायपुर के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के हाथों उन्होंने मुख्यमंत्री पुरस्कार ग्रहण किया है।
ज्ञात हो कि वर्ष 2024 में रागिनी मिश्रा डीएसपी ने अजाक के पद पर पदस्थ रहते हुए अनुसूचित जनजाति वर्ग के लगभग 40 से ऊपर प्रकरणों का समय पर विवेचना कर निराकरण किया। इनमें लगभग 15 ऐसे प्रकरण थे जिसमें 7 से 15 दिनों के भीतर प्रस्ताव तैयार कर पीड़ित को राहत राशि दिलाने में रागिनी मिश्रा ने अहम योगदान दिया है।इसी तरह 15 से 20 प्रकरणों में पात्र के लिए दैनिक मजदूरी, आहार व्यय, यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता के साथ अन्य राहत दिलाने में उन्होंने सार्थक भूमिका निभाई।
इसके अलावा अनुसूचित जनजातियों के लिए शासन के माध्यम से चलाए जा रहे योजनाओ को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार प्रचार करते हुए रागिनी मिश्रा ने इस समुदाय के लोगो को जागरूक किया औऱ शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। एक अन्य जानकारी के अनुसार रागिनी मिश्रा नशामुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी के रूप में सामुदायिक पुलिसिंग के तहत गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को नशे के दुष्परिणाम से न केवल अवगत कराया बल्कि उन्हें नशे से दूर रहने की सलाह देते हुए सामाजिक दायित्व को भी पूरा किया। पुरस्कार ग्रहण करने के दौरान परिवार के वरिष्ठ सदस्य बंशीलाल गौरहा, दिनेश गौरहा, श्रीमती दिया गौरहा, श्रीमती मंजू जगदीश मिश्रा, जितेंद्र गौरहा उपस्थित होकर उनका उत्साहवर्धन किया।
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