28 आबकारी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मिली जमानत, खतरे में जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता

बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने 28 आबकारी अधिकारियों को अग्रिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से इन अधिकारियों की गिरफ्तारी फिलहाल टल गई है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच अभी भी जारी है।

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार यह घोटाला केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि इसमें एक संगठित कारोबारी गठजोड़ भी शामिल थी। शराब के लाइसेंस देने से लेकर कमीशन तय करने तक की प्रक्रिया में गड़बड़ियां की गईं। जिससे निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। बदले में संगठित गिरोह के सदस्यों को कमीशन के रूप में मोटी रकम मिलती थी। इस घोटाले में शामिल लोगों ने विदेशी शराब कंपनियों पर भी बिक्री के बदले तय कमीशन देने का दबाव बनाया और यह राशि बाद में फर्जी कंपनियों और फ्रंट फर्म्स के जरिए इधर-उधर की गई। आपको बता दे प्रदेश में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, निरंजन दास, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल समेत कई प्रभावशाली लोगों ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया। इस गिरोह के माध्यम से सरकारी शराब की दुकानों की आपूर्ति पर कमीशन, अतिरिक्त शराब उत्पादन की अवैध बिक्री और विदेशी शराब की अवैध वसूली की व्यवस्था की गई। जांच के दौरान यह भी बात सामने आई कि वर्ष 2020-21 में नई शराब नीति लागू की गई। इस नीति के माध्यम से तीन निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। ओम साईं बेवरेज, नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा. लि, दिशिता वेंचर्स प्रा. लि. के माध्यम से 32 सौ करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले को अंजाम दिया गया। अब तक छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुण पट्टी त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह, विजय कुमार भाटिया, संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह समेत कई नेताओं और कारोबारियों को घोटाले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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