बिलासपुर। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने CGPSC भर्ती घोटाला में सरकार की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार को 37 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने सरकार से पूछा कि परीक्षा नियंत्रक को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद भी जांच अधूरी क्यों है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब 37 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, तो अब तक उन्हें नियुक्ति आदेश क्यों नहीं दिए गए।
दरअसल 37 सलेक्टेड कैंडिडेट्स को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से नियुक्ति के लिए हरी झंडी मिल गई थी, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट से मिले नियुक्ति आदेश का पालन करने के बजाय फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी। इसी पर डिवीजन बेंच ने आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि, मामले की जांच कब तक पूरी हो जाएगी। इस पर सरकारी एडवोकेट ने कहा कि मामले की जांच CBI कर रही है। इस पर कोई तय तिथि हम नहीं बता सकते।
वहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से मिले जवाब के बाद कहा कि सरकार जांच की तिथि बताने में असमर्थ है, तो छात्रों के भविष्य को CBI की जांच के बेसिस पर लटका के नहीं रखा जा सकता है। सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा।
हालांकि, यह भी मेंशन है कि जांच पूरी होने के बाद, जो फैसला आएगा उससे नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। यानी कैंडिडेट्स को अभी तो सरकारी नौकरी मिलने का आदेश कोर्ट की ओर से जारी कर दिया गया है, लेकिन CBI जांच पूरी होने के बाद कोई मामला पाया जाता है तो उसकी नौकरी तब प्रभावित हो जाएगी।
चयन से वंचित कैंडिडेट्स ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
नियुक्ति रोके जाने का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर हुआ, जिनका चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर हुआ था। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है। इस पर भर्ती से वंचित 60 से अधिक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि योग्यता के बलबूते पर चयन हुआ है, लेकिन नियुक्ति नहीं देना अन्याय और अवैधानिक है।
दरअसल, CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए।
इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, लेखाधिकारी, जेल अधीक्षक, नायब तहसीलदार समेत 20 सेवाओं के पद शामिल थे। चयन प्रक्रिया में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाई। रिजल्ट जारी होने के बाद परीक्षा में धांधली और पीएससी के अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों और नेताओं के रिश्तेदारों के चयन होने के बाद मामला विवादों में आ गया। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया है। सरकार को 37 सिलेक्टेड कैंडिडेट्स को नियुक्ति का आदेश दिया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने CGPSC भर्ती घोटाला मामले में सरकार की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार को 37 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने सुनवाई की।
इस दौरान चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने सरकार से पूछा कि परीक्षा नियंत्रक को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद भी जांच अधूरी क्यों है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब 37 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, तो अब तक उन्हें नियुक्ति आदेश क्यों नहीं दिए गए। उन्हें अनिश्चितता में क्यों रखा गया है?
दरअसल, इसके पहले 37 सलेक्टेड कैंडिडेट्स को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से नियुक्ति के लिए हरी झंडी मिल गई थी, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट से मिले नियुक्ति आदेश का पालन करने के बजाय फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी। इसी पर डिवीजन बेंच ने आदेश जारी किया है।
CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी।
सरकार ने कोर्ट को जांच की तय तारीख नहीं बताया
हाईकोर्ट के एडवोकेट अमन तम्बोली ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि, मामले की जांच कब तक पूरी हो जाएगी। सरकारी एडवोकेट ने कहा कि मामले की जांच CBI कर रही है। इस पर कोई तय तिथि हम नहीं बता सकते।
वहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से मिले जवाब के बाद कहा कि सरकार जांच की तिथि बताने में असमर्थ है, तो छात्रों के भविष्य को CBI की जांच के बेसिस पर लटका के नहीं रखा जा सकता है। सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा।
हालांकि, यह भी मेंशन है कि जांच पूरी होने के बाद, जो फैसला आएगा उससे नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। यानी कैंडिडेट्स को अभी तो सरकारी नौकरी मिलने का आदेश कोर्ट की ओर से जारी कर दिया गया है, लेकिन CBI जांच पूरी होने के बाद कोई मामला पाया जाता है तो उसकी नौकरी तब प्रभावित हो जाएगी।
चयन से वंचित कैंडिडेट्स ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
नियुक्ति रोके जाने का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर हुआ, जिनका चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर हुआ था। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है। इस पर भर्ती से वंचित 60 से अधिक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि योग्यता के बलबूते पर चयन हुआ है, लेकिन नियुक्ति नहीं देना अन्याय और अवैधानिक है।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए।
इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, लेखाधिकारी, जेल अधीक्षक, नायब तहसीलदार समेत 20 सेवाओं के पद शामिल थे। चयन प्रक्रिया में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाई।
रिजल्ट जारी होने के बाद परीक्षा में धांधली और पीएससी के अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों और नेताओं के रिश्तेदारों के चयन होने के बाद मामला विवादों में आ गया।
जानिए कैसे खुला था घोटाले का राज ?
पूर्व मंत्री और भाजपा के सीनियर नेता ननकीराम कंवर ने भर्ती घोटाले को उजागर करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसमें उन्होंने ऐसे अधिकारी और नेताओं के रिश्तेदारों की सूची सौंपी, जिसमें उनके रिश्तेदारों का चयन कर उन्हें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित अन्य पद दिए गए।
हाईकोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते जांच के आदेश दिए। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच कराई। फिर बाद में CBI को जांच की घोषणा की। इधर, CBI जांच के चलते नियुक्ति आदेश रोक दिए गए थे।
12 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
CBI ने 19 सितंबर को 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें PSC की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, PSC के पूर्व सचिव और रिटायर्ड IAS जीवनलाल ध्रुव, उनके बेटे सुमित ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल शामिल हैं।
इससे पहले 18 नवंबर को CBI ने तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 10 जनवरी को 5 और आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
इनमें नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष का भतीजा, डिप्टी कलेक्टर चयनित), ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, CGPSC), शशांक गोयल, भूमिका कटियार (दोनों डिप्टी कलेक्टर चयनित) और साहिल सोनवानी (डीएसपी चयनित) शामिल थे। हालांकि रायपुर जेल में बंद पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के बेटे नितेश सोनवानी, भतीजे साहिल सोनवानी, कारोबारी श्रवण गोयल के बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिल चुकी है। वे अभी जमानत पर बाहर हैं, बाकी आरोपी जेल में हैं।
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