बिलासपुर। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कोनी में बन रहे सौ करोड़ रुपए की एक सड़क पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिए है। उनका कहना है कि इतनी मंहगी सड़क किसको लाभ पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है ? क्या सड़क के बन जाने से शहर की जनता को इसका लाभ मिलेगा ? यदि जनता को लाभ मिलने वाला है तो किसी निजी व्यक्ति की जमीन के सामने जाकर क्यों समाप्त हो जा रही है। यही नहीं इस सड़क निर्माण के लिए टेंडर कब निकाला गया ? इसका DPR कहां है। यह सड़क किस मद की राशि से बनाया जा रहा है।
कोनी में कमिश्नर कार्यालय की नई बिल्डिंग के पीछे अरपा नदी के किनारे एक सड़क बन रही है। बताया जा रहा है कि इस सड़क पर अभी तक सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके है। लेकिन इसका काम अभी केवल 60 प्रतिशत ही हुआ है। मतलब साफ है कि अभी इसके निर्माण में 60 से 70 करोड़ रुपए और हो सकती है। इस सड़क निर्माण को लेकर पिछले कई दिनों से शहर में चर्चा चल रही थी। लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सवाल करने की हिम्मत किसी में नहीं था। अब इस सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। उन्होंने निमार्णाधीन सड़क में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करके सवाल खड़ा किया कि इस निर्माणाधिन सड़क का लाभ किसे मिलेगा ? शहर के कितने लोग इस सड़क का उपयोग करेंगे ? ये सड़क किस मद की राशि से बनाया जा रहा है ? इसका निर्माण करने के लिए टेंडर कब निकाला गया था ? इसका DPR कहां है ? यदि यह सड़क शहर की जनता के लिए बनाया जा रहा है तो इसका निर्माण कमिश्नर कार्यालय के पीछे से शुरू होकर 5 – 7 किलोमीटर जाकर खत्म क्यों हो जा रहा है ? कोनी में कमिश्नर कार्यालय के नए भवन के पीछे नदी किनारे कथित अवैध सड़क पर आयोजित प्रेस कांग्रेस में विजय केशरवानी ने कहा कि जिले के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की हालत बस से बदतर हो चुकी है। इस बात को लेकर कांग्रेस पार्टी ने धरना प्रदर्शन और आंदोलन करने का निर्णय लिया है। ग्रामीण व शहर की ख़राब सड़को की दुर्दशा को लेकर मोपका की जर्जर सड़क पर कल शनिवार 1 बजे बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान उन्होंने सरकार से सवाल किया कि प्रदेश के उपमुख्य मंत्री व लोक निर्माण मंत्री बिलासपुर से हैं। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि है। इस छेत्र के स्थानीय विधायक सुशांत शुक्ला भी सत्ताधारी दल के है। इसके बावजूद बिलासपुर जिले में सड़को की स्थिति बदतर है। सवाल उठता है क्यों ? और सवाल यह भी उठता है कि जब पूरे जिले की सड़कें खस्ताहाल हैं, तो एक सुनसान इलाके में 100 करोड़ रुपए की सड़क किसके लिए बनाई जा रही है ? नदी किनारे बनी यह सड़क आगे जाकर निजी भूमि पर खत्म क्यों हो रही है ? उन्होंने कहा कि शहर में जहाँ वास्तविक आबादी है, वहाँ की टूटी सड़कों को छोड़कर करोड़ों की राशि खर्चकर सुनसान इलाके में 100 करोड़ रुपए क्यों फूंका जा रहा है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी का कहना है कि उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय मंत्री व सांसद तोखन साहू और स्थानीय विधायक सुशांत शुक्ला तीनों सत्ताधारी दल के नेता है। इस सड़क की जानकारी उन्हें जरूर होगा। इसके बावजूद तीनों में से किसी ने भी यह नहीं पूछा कि यह सड़क किसके लिए बनाई जा रही है ?
उन्होंने बताया कि जहाँ यह सड़क बनाई जा रही है, वह क्षेत्र स्मार्ट सिटी की सीमा में आता ही नहीं, फिर भी स्मार्ट सिटी और नगर निगम के फंड का उपयोग यहाँ कर दिया गया। न DPR सार्वजनिक किया गया, न जन-सुनवाई हुई, न पर्यावरणीय अनुमति दिखाई गई और न ही संवेदनशील नदी तट से संबंधित किसी नियम का पालन किया गया। केशरवानी ने कहा कि विडंबना तो ये है कि जिस स्थान पर यह सड़क बनाई जा रही है, वहां न आबादी है, न ट्रैफिक है, न कोई सार्वजनिक आवश्यकता है। इसके बावजूद अरपा तट के सुनसान क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क निर्माण किया गया और यह सड़क आगे जाकर निजी जमीन पर आकर रुक जाती है। कांग्रेस का आरोप है कि यह सड़क न तो सार्वजनिक आवश्यकता के अनुरूप है, न किसी घोषित योजना का हिस्सा। सड़क जिस स्थान पर खत्म होती है वहाँ सिर्फ निजी भूमि है। जिससे स्पष्ट है कि इसका उद्देश्य जनता के बजाय “कुछ गिने-चुने हितधारकों को लाभ पहुंचाना है।
00 कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल
अरपा तट की 80 फीट लगभग 80 से 100 करोड़ की सड़क का DPR कहाँ है ?
क्या स्मार्ट सिटी फंड का उपयोग गैर-स्मार्ट सिटी क्षेत्र में करना नियमों के अनुरूप है ?
क्या अधिकारियों ने प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति शासन से छुपाई ?
सड़क निजी जमीन पर आकर क्यों रुक जाती है ?
नदी तट नियम और इको-संवेदी क्षेत्र के मानक कहाँ हैं?
जब शहर और ग्रामीण छेत्र की सड़कें जर्जर हैं, तो अरपा किनारे वीरान और सुनसान सड़क पर 100 करोड़ क्यों डाले गए ?
क्या प्रोजेक्ट पर कोई जन-सुनवाई हुई है ? यदि नहीं, तो क्यों ?
क्या प्रशासन और शासन को समय पर सटीक जानकारी दी गई थी ?
अरपा नदी के बीचों-बीच सड़क निर्माण के पीछे किसका दबाव था ?
यह सड़क सार्वजनिक जरूरत है या निजी हितों के लिए तैयार की गई परियोजना ?
केंद्रीय मंत्री, उपमुख्यमंत्री, बेलतरा विधायक और स्थानीय विधायक को जानकारी होने के बाद भी ‘चुप्पी’ क्यों बनी रही ?क्या यह प्रोजेक्ट किसी विशेष लाभार्थी के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है ?
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