जांजगीर-चांपा। जनता के बीच पुलिस की छवि सुधारने की जरूरत है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रायपुर में संपन्न हुई 60 वीं अखिल भारतीय डीजीपी आइजीपी कॉन्फ्रेंस के पहले दिन स्पष्ट कहा। यह टिप्पणी देशभर की पुलिसिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश थी, लेकिन जांजगीर जिले की मौजूदा वास्तविकता इस सलाह को कटु व्यंग्य में बदल देती है। सवाल यही है कि छवि सुधरे कहाँ से और कैसे जब 78 लाख की लूट और गोलीकांड में नौ माह बाद भी पुलिस खाली हाथ है और दूसरी तरफ खेतों में लाखों के जुए के फड़ खुलेआम सज रहे हैं।
जांजगीर-चांपा जिले के पिसौद, पीथमपुर, उदयबन और आसपास के खेतों में शाम चार बजे के बाद जुआरियों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। ताश की गड्डियां खुलती हैं, मोटरसाइकिलें कतार में लगती हैं और दांव पर लाखों रुपये रखे जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में जुए की ऐसी महफिलें दिखाई देती हैं जिनमें लेनदेन तक साफ नजर आता है। वीडियो भले अपुष्ट हो, पर गांवों में जुआ फड़ लगने की शिकायतें वर्षों पुरानी हैं और स्थानीय लोग इसे लेकर बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि पुलिस की गश्त के बावजूद जुआ नेटवर्क उतनी ही तेजी से फैल रहा है जितनी तेजी से वह फड़ बदलता है।
जिला पुलिस ने कई बार कार्रवाई की है। अक्टूबर 2025 में रमन नगर में छापेमारी के दौरान छह पटवारियों समेत आठ जुआरी गिरफ्तार किए गए थे और लगभग बीस लाख रुपये बरामद हुए थे। पामगढ़ और चांपा क्षेत्र में खेतों और सड़क किनारे से कई जुआरियों को पकड़ा गया था। पीथमपुर गांव में दस जुआरी गिरफ्तार हुए। मुलमुला क्षेत्र में चुनाव के बाद जुआ फड़ फिर सक्रिय हो गए। एसपी विजय पांडे ने गश्त बढ़ाई है पर परिणाम सतही हैं। पुलिस पहुँचते ही फड़ समेट लिए जाते हैं और अगले दिन नई जगह पर फिर से खुल जाते हैं। वायरल वीडियो बताता है कि यह सिर्फ दैनिक कोशिशों से रुकने वाला नेटवर्क नहीं है बल्कि एक संगठित तंत्र है जिसे तोड़ने के लिए तगड़ी रणनीति चाहिए।
इसके समानांतर जिले का सबसे बड़ा अपराध भी आज तक अनसुलझा है। 14 जनवरी 2025 की शाम 78 लाख रुपये की लूट और गोलीकांड में जांजगीर पुलिस नौ महीने की दौड़भाग के बावजूद एक भी ठोस सुराग तक नहीं पहुंच सकी है। सरकारी शराब दुकान के सामने बदमाशों ने कलेक्शन टीम पर हमला किया, गार्ड को गोली मारी, कैश बैग उठाया और नीली एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिल से फरार हो गए। तत्कालीन एसपी विवेक शुक्ला रात में ही मौके पर पहुंचे। आईजी संजीव शुक्ला ने निरीक्षण कर दिशा निर्देश दिए। कई जिलों में दबिश दी गई, CCTV फुटेज खंगाले गए, संदिग्धों का हुलिया जारी किया गया और इनाम पांच लाख रुपये तक बढ़ाया गया। इसके बावजूद अपराधियों का न तो कोई लोकेशन मिला, न कोई नेटवर्क सामने आया।
चार माह तक विवेक शुक्ला एसपी रहे पर सफलता नहीं मिली। इसके बाद मई 2025 से आईपीएस विजय पांडे ने जिले की कमान संभाली। पर नए एसपी के नेतृत्व में भी जांच की दिशा बदलने के बावजूद कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई। नौ महीने बाद भी पुलिस की स्थिति वही है जहाँ पहले दिन थी। अपराधियों ने खुद को इतनी चतुराई से छिपाया है कि पुलिस द्वारा लगाए गए तमाम प्रयास व्यर्थ साबित हो रहे हैं।
इन दोनों परिदृश्यों से एक ही सवाल उभरता है कि जब बड़ा अपराध सुलझता नहीं और छोटा अपराध रुकता नहीं तो पुलिस की छवि आखिर कैसे सुधरेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा था कि पुलिस को जनता का विश्वास जीतना चाहिए। पर विश्वास न शब्दों से लौटता है न वादों से, बल्कि नतीजों से।
78 लाख लूटकांड की जांच अपनी जगह ठप है और खेतों में लाखों का जुआ भी अपनी जगह बेकाबू है। यही जांजगीर की जमीनी तस्वीर है जो प्रधानमंत्री की सलाह के ठीक उलट दिशा में जाती दिख रही है। यह स्थिति बताती है कि पुलिस की छवि सुधारने का रास्ता सिर्फ गश्त बढ़ाने या पोस्टर लगाने से नहीं बल्कि नेटवर्क तोड़ने, अपराधियों को पकड़ने और ठोस परिणाम देने से होकर गुजरता है।
जांजगीर पुलिस को अब दोनों मोर्चों पर निर्णायक कदम उठाने होंगे। लूटकांड सुलझे, आरोपी गिरफ्तार हों और जुआ नेटवर्क पर स्थायी कार्रवाई हो तभी जनता का भरोसा लौटेगा और तभी वह छवि भी सुधरेगी जिसकी बात प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर उठाई थी।
Author Profile

Latest entries
बिलासपुरMarch 19, 2026दो बकरी चोर गिरफ्तार, 31 बकरा – बकरी जप्त, 4 बकरों को काटकर बेच चुके थे आरोपी
बिलासपुरMarch 18, 2026बाघ और तेंदुआ के शिकार में डिप्टी रेंजर समेत 9 शिकारी गिरफ्तार, खाल और नाख़ून जप्त
बिलासपुरMarch 18, 2026गैस सिलेंडर की कालाबाजारी : खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 365 सिलेंडर जप्त
UncategorizedMarch 17, 2026SDM ने बेजा कब्जा के अपिल आवेदन को किया खारिज, हाईकोर्ट के निर्देशों का हुआ पालन, कोटवारी जमीनों पर दुकान- मकान बनाकर बेचने वाले भू माफियाओं में हड़कंप
