जयरामनगर में नियम कानून को ताक पर रख चलाया जा रहा खदान, खनिज विभाग और DGMS की जांच में आई ढेरों खामियां

बिलासपुर। जयराम नगर के खैरा में नियम कानून को ताक पर रखकर खदान चलाया जा रहा है। खनिज विभाग और DGMS ने अपनी जांच में कई खामियां पाई है। माना जा रहा है हाईकोर्ट के आदेश पर हुई इस जांच के बाद खदान संचालक के खिलाफ सख्त करवाई हो सकती है।

मस्तुरी क्षेत्र में लगभग 20 से ज्यादा स्टोन क्रेशर है जो शासन के नियमो को दरकिनार कर चलाया जा रहा है। अपने रसूख के दम पर खदान चलाने वाले अवैध बोर ब्लास्टिंग कर रहे है जबकि उन्हें केवल छोटी ब्लास्टिंग करने की अनुमति है। यही नही इन खदानों से उड़ने वाली धूल, मशीन की आवाज जैसी समस्याओ से लोग प्रतिदिन जूझ कर जिंदगी जीने को मजबूर है। समस्याओं को लेकर शिकायते बहुत होती है अधिकारी भी मौके पर पहुचते है। लेकिन खदान संचालक की मनमानी को अपनी आंखों से देखकर लौट जाट जाते है। अधिकारी इन क्रेशर संचालको पर कार्यवाही नही कर पाता है। अधिकारियो का यह रवैया क्षेत्रवाशियो के लिए एक पहेली बन गया है। ऐसा ही एक ताजा मामला जयरामनगर खैरा का आया है जहाँ कपिलेन्द्र शर्मा अपने रसूख के दम पर स्टोन क्रेशर चला रहे है। खदान पिछले कई सालों से शासन की नियमो का पालन किये बिना ही चल रहा है। कार्रवाई नही होने के कारण कपिलेन्द्र शर्मा की मनमानी दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। इन्ही सब कारणों से जयरामनगर सरपंच प्रतिनिधि कमल अग्रवाल ने 7 माह पहले खनिज विभाग सहित कई अधिकारियो को शिकायत किया था। करवाई नही होने पर हाईकोर्ट के शरण मे गए। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को 90 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के तहत खनिज विभाग, डीजीएमएस और पर्यावरण विभाग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना है। बताया जा रहा है कि खिनीज विभाग ने अपनी जांच पूरी कर ली है। DGMS ने जांच पूरी कर ली है लेकिन पर्यावरण के अधिकारी अभी तक खदान तंक नही पहुंचे है। जानकारों के अनुसार खनिज और DGMS की जांच में कई खामियां सामने आई है। जिसमें सबसे गंभीर बात ये है कि खदान रिहायसी इलाके में चलाया जा रहा है। इसके अलावा गांव के लोगों ने ब्लास्टिंग को लेकर भी अपने बयान दर्ज कराए है। जांच में पाया गया कि संचालित खदान घरों से माहज 80 मीटर, शासकीय भवन से महज 50 मीटर, अवैध बोर ब्लास्टिंग, मजदूरों को कोई सुरक्षा किट नही, क्रेसर में बिना पानी पम्प का उपयोग जैसी अन्य कई कमियां पाई गई है। जिससे स्पष्ट होता है कि शासन की जो गाईड लाईन है उसे पालन किये बिना ही खदान को चलाया जा रहा है।

Author Profile

नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *