आदिवासी जमीन का फर्जीवाड़ा, कलेक्टर के आदेश का नहीं हुआ पालन और हो गई रजिस्ट्री

बिलासपुर। जिले के सकरी में एक आदिवासी की जमीन फर्जीवाड़ा तरीके से खरीदी और बिक्री करने का मामला सामने आया है। तत्कालीन कलेक्टर ने आदिवासी को कुछ शर्तों के आधार पर जमीन बेचने की अनुमति दी थी। लेकिन एक बार रजिस्ट्री होने के बाद भू माफियों ने शर्तों को दरकिनार कर जमीन तीसरे व्यक्ति को बेच दी।

दरअसल 16 सितम्बर 2019 को सकरी क्षेत्र में रहने वाले इन्दाराम नेताम ने अपने स्वामित्व की जमीन लगभग साढ़े 3 एकड़ को एक सामान्य वर्ग के व्यक्ति को बेचने के लिए कलेक्टर से अनुमति मांगा था। इन्दाराम नेताम ने राजस्व न्यायलय में आवेदन देकर कहा कि वह सकरी के हाफा क्षेत्र के पटवारी हल्का नंबर 44 के खसरा नंबर 24/1, 59/3, 133, 135, 451, 756, 989, 990 वाली कुल 3.19 एकड़ जमीन को मंगला में रहने वाले सुभाष सिंह राजपूत से 15 लाख 10 हज़ार रुपए में बेचना चाहता है। तत्कालीन कलेक्टर सारांश मित्तर ने इन्दाराम को ज़मीन बेचने की अनुमति दे दी, लेकिन ज़मीन खरीदने वाले सुभाष सिंह राजपूत के लिए एक लिखित आदेश पारित किया जिसमें 8 शर्त रख दी। उन शर्तों में से शर्त नंबर 4 के अनुसार क्रेता द्वारा भूमि क्रय करने की तिथि से तीन वर्ष तक किसी अन्य व्यक्ति को उस भूमि का अंतरण नहीं किया जावेगा।
इसी तरह शर्त नंबर 5 कहती है कि आवेदित भूमि आगामी 3 वर्ष तक अन्य प्रयोजन हेतु व्यपवर्तनीय नही होगी और शर्त नंबर 8 ये कहती है कि उपरोक्त शर्तों के उल्लंघन तथा विवाद आदि की स्थिति में ये अनुमति आदेश स्वमेव निरस्त माना जाएगा।
27 जनवरी 2021 को सुभाष सिंह राजपूत ने इन्दाराम नेताम की जमीन अपने नाम पर रजिस्ट्री करवा लिया। कलेक्टर ‌द्वारा लगाई गई शर्त के कारण सुभाष सिंह राजपूत भूमि क्रय करने की तिथि से तीन वर्ष तक यानी 27 जनवरी 2024 तक इस ज़मीन को किसी और को नहीं बेच सकता था। यदि उसने ऐसा किया तो कलेक्टर द्वारा अनुमति स्वतः ही शून्य मानी जाएगी और ज़मीन वापस मूल आदिवासी स्वामी के पास चली जाएगी।
लेकिन तत्कालीन कलेक्टर सारांश मित्तर द्वारा जारी आदेश की शर्तों को दरकिनार करते हुए सुभाष राजपूत ने डेढ साल के अन्दर ही तीन अलग अलग लोगों को एक एकड़ जमीन बेच दिया। जिसमें से एक कांग्रेस नेता अभिनव तिवारी है और दो अन्य में प्रदीप पटेल, भाग्यश्री मिश्रा शामिल है।
इस पूरे घपलेबाजी में वर्तमान पटवारी लक्ष्मी नारायण कुर्रे, तत्कालीन तहसीलदार, उप रजिस्ट्रार लक्ष्मी पांडे की भूमिका भी बेहद संदिग्ध है। इन्होने जानबूझकर करोड़ों की ज़मीन का फर्जीवाड़ा किया है। सूत्रों की माने तो अगर सही तरीके से निष्पक्ष जांच की जाए तो सुभाष सिंह राजपूत एवं उसके अन्य साथियों द्वारा की गई और भी घपलेबाजियां उजागर हो सक्ती हैं।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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