बिलासपुर। राज्यपाल रमेन डेका के दौरे ने टाइगर रिजर्व का पोल खोलकर रख दिया। दो दिन रहे राज्यपाल को टाइगर रिजर्व में न टाइगर दिखा न चीतल, भालू, वनभैंसा दिखा। अधिकारी लोग उन्हें तालाब के एक छोर से हांथी का पिलवा दिखाकर वाहवाही बटोर रहे है। राज्यपाल भी केवल जंगल घूमकर गदगद है। यही नहीं जंगल में जंगल की सघनता भी आधी रह गई है। इससे स्पष्ट है कि जंगल में लकड़ी तस्करों का राज है।
राज्यपाल रमेन डेका ने आज मुंगेली जिले के टाइगर के लिए सबसे प्रसिद्ध अचानकमार टाइगर रिजर्व का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जंगल सफारी का जमकर आनंद लिया। दो दिन तक टाइगर रिजर्व में राज्यपाल को वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल तो घुमाया लेकिन वन्य प्राणी के रूप में केवल हाथी का एक पिल्ला ही दिखा पाए। जंगल में न तो वनभैंसा दिखा पाए और न ही चीतल दिखा पाए। कम से कम जंगली सूअर दिखा देते तो टाइगर रिजर्व की इज्जत बढ़ जाती। जबकि वन विभाग के अधिकारियों को इज्जत बढ़ानी थी तो मरवाही ले जाकर सफेद भालू दिखा देते। राज्यपाल ने काला भालू तो बहुत देखे होंगे लेकि सफेद भालू देख लिए होते तो उन्हें भी लगता छत्तीसगढ़ में कुछ तो खास है। लेकिन अधिकारियों ने उन्हें केवल हाथी का पिल्ला हो दिखाया। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने जो हाथी का पिल्ला उन्हें दिखाया है यह भी पालतू हाथी का पिल्ला है। राज्यपाल को दिखाने के लिए उन्हें कैंप से खोलकर छोड़ दिया था। आपको बता दे कि वन विभाग के बड़े अधिकारियों का दावा है कि टाइगर रिजर्व में कम से कम दो दर्जन टाइगर है। वैसे बता दे वन विभाग के अधिकारी हमेशा से जनप्रतिनिधियों को टोपी पहनाते रहे है। इसके पहले एक विधानसभा अध्यक्ष को रात में कोटरी दिखाकर उसे टाइगर बता चुके है। रात के अंधेरे में कोटरी की आंख चमका और अधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष को बता दिया कि जो आंख चमक रही है वही टाइगर है। वहां से लौकलटकर सभी अखबारों में खबर भी छपी कि विधानसभा अध्यक्ष ने ATR में टाइगर देख लिया। अब वन विभाग के अधिकारियों को जंगल में दिखाने के लिए कुछ नहीं मिला तो अंचल की महिलाओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों को दिखाकर वाहवाही बटोर ली। उन्होंने बैगा और गोंड जनजाति की पारंपरिक ट्राइबल पेंटिंग्स तथा स्थानीय हस्तशिल्प की सराहना भी की। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह क्षेत्र हिरण, हाथी, टाइगर सहित कई वन्य प्राणियों के विचरण का प्रमुख क्षेत्र है। लेकिन दो दिन में कुछ विचरण करते दिखाई नहीं दिए। गौरतलब है कि मुंगेली जिले का सिहावल क्षेत्र मनियारी नदी का उद्गम स्थल भी माना जाता है। इस अवसर पर कलेक्टर कुन्दन कुमार द्वारा राज्यपाल को जनजातीय कला पर आधारित स्मृति चिन्ह एवं प्राकृतिक कोसे से निर्मित शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर फील्ड डायरेक्टर अभिषेक सिंह, एडीसी ओम भविष्यकर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, डीडी एटीआर, यू आर गणेशन, सीईओ जिला पंचायत प्रभाकर पांडेय सहित, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण, फूड एवं राजस्व सहित अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
00 जंगल की सघनता गायब
वन विभाग के अधिकारियों ने राज्यपाल को जंगल सफारी कराके भले उनसे शाबाशी ले ली हो। लेकिन इस दो दिन के जंगल सफारी में जंगल की दुर्दशा को जगजाहिर कर दिया है। जंगल में वन्य प्राणी कही नहीं दिखे यह स्पष्ट हो गया है। लेकिन जंगल से गायब होते पेड़ पर किसी की नजर नहीं आई या फिर जानबूझकर इसे दबाने का प्रयास किया। वास्तविकता ये है कि टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल को और घना होना चाहिए लेकिन इसके उलट हो रहा है। जंगल के अंदर पेड़ों की ठूंठ ज्यादा दिख रहा है। पेड़ों के बीच की दुरियां भी ज्यादा दिखाई दे रही है। इससे स्पष्ट है कि जंगल में पेड़ो की कटाई हो रही है। वन विभाग के अधिकारी फील्ड से गायब है लकड़ी चोर जंगल में सक्रिय है। जंगल से लाखों पेड़ काटे जा चुके है और साल और सागौन के पेड़ तस्करों के हवाले किया जा रहा है।
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