बिलासपुर। पूरा प्रदेश कोपरा जलाशय को रामसर साइट बनाने का सपना देख रही है। लेकिन जलाशय को बर्बाद करने के लिए लगभग सभी विभागों से हरि झंडी मिल गई है। महावीर कोल वाशरी को पावर प्लांट, स्टील प्लांट और एस ब्रिक्स प्लांट लगाने के लिए ज्यादातर विभागों से अनुमति मिल गई है। मतलब साफ है कि वहां जलाशय के आसपास जो दर्जनों अवैध कोल चल रहे है वह भी नहीं हटने वाला है। रामसर साइट का सपना चकनाचूर होने वाला है।
पिछले दिनों बिलासपुर के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के प्रयास से प्रदेश का पहला रामसर साइट कोपरा जलाशय में बनाने का निर्णय हुआ था। इसके लिए बैठकों का दौर भी शुरू हो गया था और जलाशय में आने वाले स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की लिस्टिंग भी की गई थी। लेकिन केंद्रीय मंत्री के प्रयास पर पानी फेरने की तैयारी शुरू हो चुकी है। क्योंकि जलाशय के नजदीक महावीर कोल वाशरी को स्टील प्लांट, पावर प्लांट और एस ब्रिक्स प्लांट लगाने की लगभग अनुमति मिल गई है। उद्योगपति को छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल, सिंचाई विभाग, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से NOC मिल गई है। मतलब साफ है कि अब केवल प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। जन सुनवाई पहले ही हो चुकी है। Democrecy.in के पास जो जानकारी है उसके अनुसार इस पूरे प्लांट में प्रतिदिन जमीन के नीचे से 490 K l पानी निकालकर उपयोग किया जाएगा। पावर प्लांट में 10 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा और 50 लाख एस ब्रिक्स बनाया जाएगा। इस प्लांट के लगने के बाद जलाशय के किनारे जो दर्जनभर कोल वाशरी है उन्हें भी नहीं हटाया जाएगा। कुलमिलाकर जलाशय कचरा और डस्ट डंप करने में उपयोग किया जाएगा। यही नहीं कोयला व्यापारी और उद्योगपति अधिकारियों से मिलकर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू को दबोचने की तैयारी कर चुके है। इधर पावर प्लांट और स्टील प्लांट खुलने की संभावना को देखते हुए जलाशय से लगे सात गांव गुस्से से सुलगने लगे है। सैकड़ों ग्रामीण आंदोलन करने की तैयारी में है। आपको बता दे कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित एक प्रमुख वर्षा-आधारित मीठे पानी की आर्द्रभूमि (wetland) है, जिसे दिसंबर 2025 में छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल घोषित किया गया है। यहां 60 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है और स्थानीय जैव विविधता व सिंचाई का मुख्य केंद्र है। यह जलाशय बिलासपुर शहर से लगभग 15-20 किमी दूर, तखतपुर ब्लॉक मेंए आता है। यह छत्तीसगढ़ का पहला और भारत का 95वां/96वां रामसर स्थल है। रामसर दर्जा मिलने से यहां इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।
00 झूठी जानकारी – : बताया जा रहा है कि प्लांट खोलने के लिए उद्योगपति ने कई झूठी जानकारी दी है। अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट में उद्योगपति ने बताया है कि प्लांट से सड़क की दूरी मात्र 2 किलो मीटर है। जबकि एयर डिस्टेंस में सड़क की दूरी 5 किलो मीटर दर्शाया गया है। ऐसे कैसे हो सकता है कि जमीन में दूरी 2 किलोमीटर हो और एयर डिस्टेंस 5 किलो मीटर हो ? यदि उनके प्रोजेक्ट रिपोर्ट का अध्ययन किया जाए तो दर्जनों ऐसी खामियां दिख जाएगी जिससे प्लांट लगाने की अनुमति नहीं मिल पाएगी। लेकिन उद्योगपतियों के जेब में बैठा सिस्टम इन सभी खामियों को अनदेखा कर रहा है।
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