बिलासपुर। रविवार को किम्स हॉस्पिटल में कोरोना का इलाज करा रहे कोरबा के एक दंपत्ति की मौत हो गई। इस मौत को लेकर मृतक दंपत्ति की पुत्री ने किम्स हॉस्पिटल पर गम्भीर आरोप लगाए है। अब सवाल ये उठ रहा है कि जब ये पूरी घटना हॉस्पिटल में घट रही थी तो नोडल अधिकारी मोनिका वर्मा मिश्रा कहां थी ? यदि वो समन्वय बनाने के लिए वहां मौजूद थी तो ये घटना कैसे घट गई ? इस मौत के लिए वो कितनी जिम्मेदार है ?
कोरोनाकाल मे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने और सरकार को बदनामी से बचाने के लिए जिले के कलेक्टर डॉ सारांश मित्तर ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एड़ी चोटी का जोर लगाके उसलापुर और आयुर्वेदिक कालेज को कोविड केयर सेंटर में तब्दील करने सफल हुए तो निजी अस्पतालों से आ रही शिकायतों पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग अस्पतालों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति। ताकि वहां मरीजों और उनके परिजन को आ रही परेशानियों को समन्वय बनाकर दूर किया जा सके। लेकिन कुछ अधिकारी अपनी हरकत से बाज नही आ रहे है। ऐसे अधिकारी सरकार के लिए लगातार समस्या खड़ा कर रहे है और पूरी सरकार को बदनाम करने पर तुले हुए है। अब किम्स का ही मामला ले लें यहां पर कोरबा से श्रुति जायसवाल अपनी मां देवकी जायसवाल और पिता रमाशंकर जायसवाल का इलाज कराने आई थी। लेकिन किम्स हॉस्पिटल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उसके माता-पिता दोनों की मौत हो गई। श्रुति यहां की अब्यवस्था से चार दिनों से जूझ रही थी लेकिन वहां उसकी मदद करने वाला कोई नही था। कलेक्टर द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी मोनिका वर्मा मिश्रा भी नहीं। श्रुति का कहना है कि 4 दिन पहले तबियत बिगड़ने पर अपने पिता रमाशंकर जायसवाल और माँ देवकी जायसवाल को यहां किम्स में एडमिट कराई थी। उनके पिता कोविड-19 पॉजिटिव थे और माँ सस्पेक्टेड थी। दोनों का सीटी स्कैन कराया गया जिसकी रिपोर्ट का आज तक पता नहीं है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया है यहां न तो प्रशिक्षित डॉक्टर है न स्टाफ और न आवश्यक उपकरण है। उनकी माँ को निगेटिव होने के बावजूद जनरल वार्ड में रखा गया। कल रात को जब आक्सीजन लेबल 35 तक पहुंच गया। आनन-फानन में उन्हें कोविड आईसीयू में शिफ्ट किया गया। वहां न तो ऑक्सीजन बेड था न स्टाफ़। केवल मां को बेड पर लिटाकर छोड़ दिया गया। वहां उन्हें कोई देखने वाला तक नहीं था। मैं लगातार अपने मम्मी और पापा के सम्बंध में अपडेट मांगती रही लेकिन किसी ने कोई जवाब नही दिया। फिर कॉल कर बताया गया कि आपके पिता को नही बचा पाए, ये हालत है। इसी वजह से मेरी मम्मी की भी मौत हो गयी। अब वो कलेक्टर से इसकी शिकायत करने वाली है। यदि नोडल अधिकारी मोनिका वर्मा मिश्रा वहां मौजूद होती तो शायद ये लापरवाही किम्स प्रबंधन नही करता। हालांकि इस मामले में उनका कहना है कि मैं किम्स में मौजूद थी। मुझे श्रुति जायसवाल का एक बार भी फोन नही आया। जब मुझे पता चला तो मैंने स्वयं उसे फोन करके जानकारी ली। रही बात किम्स के लापरवाही की तो नोटिस जारी किया गया है। किम्स प्रबंधन से जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
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