विकास तिवारी के बाद शिक्षा विभाग का एक और बाबू तत्काल प्रभाव से निलंबित, पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण में भारी अनियमितता करने का है आरोप

बिलासपुर। शिक्षा विभाग को विवादित बाबुओं से मुक्ति नहीं मिल रही है। एक को निलंबित करो तो दूसरा आ जाते है। इस बार शिक्षा विभाग में विवादित बाबू की भूमिका में सुनील कुमार यादव सामने आए है। हालांकि उन्हें भी सस्पेंड कर दिया गया है। लेकिन सस्पेंड कोई सजा नहीं है क्योंकि इसके पहले भी ट्रांसफर पोस्टिंग घोटाले में विभाग के विवादित बाबू विकास तिवारी को सस्पेंड किया गया था। लेकिन चंद महीने बाद बहल कर दिया गया था। जबकि घोटाले की राशि अभी कहां है किसी को खबर नहीं है।

शिक्षा विभाग में शिक्षकों के ट्रांसफर, पोस्टिंग, पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण हमेशा एक बड़ा दुकान रहा है। हर साल हर जिले में दो चार करोड़ रुपए का खेल हो ही जाता है। विधान सभा चुनाव के ठीक पहले पूरे प्रदेश में ट्रांसफर पोस्टिंग का बड़ा खेल हुआ था। हर संभाग में शिक्षकों से 2 से लेकर 3 लाख रुपए की वसूली हुई थी। प्रदेशभर में लगभग सौ करोड़ रुपए का खेल हुआ था। जब मामला खुला तो सबसे पहले शिक्षामंत्री को हटाना पड़ा। इसके बाद संयुक्त संचालक और कई DEO को हटाकर सस्पेंड करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में इस मुद्दे को जोरदार भुनाया। यह बात अलग है कि भाजपा की सरकार बनते ही सभी निलंबित अधिकारी बहाल हो गए। इसका नतीजा ये हुआ कि शिक्षा विभाग में नई पीढ़ी के अधिकारियों और बाबुओं का हौसला बढ़ गया। यही कारण है कि जब उनको भी अवसर मिला तो वो भी अवसर का फायदा उठाते हुए दोनों हाथ से माल बटोर लिए। लेकिन हर बार की तरह फिर बवाल हो गया। इस शिक्षा विभाग के बाबू सुनील यादव को निलंबित कर दिया गया। शिक्षा विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की अगली कड़ी है। जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर ने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता के मामले में कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दयालबंद, विकासखंड बिल्हा निर्धारित किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सुनील यादव के विरुद्ध युक्तियुक्तकरण एवं संशोधित पदोन्नति प्रकरण में कथित अनियमितता की शिकायत सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच तीन सदस्यीय दल से कराई गई। जांच समिति द्वारा 31 अगस्त एवं 23 सितम्बर 2026 को प्रस्तुत प्रतिवेदन तथा संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद श्री यादव को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। श्री यादव द्वारा 25 सितम्बर को प्रस्तुत जवाब को संतोषप्रद नहीं पाया गया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर पदीय दायित्वों के निर्वहन में बरती गई गंभीर अनियमितता को प्रथमदृष्टया प्रमाणित मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। निलंबन अवधि में श्री यादव को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। आदेश तत्काल प्रभावशील किया गया है। बता दे इसके 3 साल पहले भी विभाग में ट्रांसफर पोस्टिंग का बड़ा घोटाला हुआ था। इसमें प्रदेशभर के 11 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था। इसके अलावा विभाग के विवादित बाबुओं को भी सस्पेंड किया गया था। जिसमें बिलासपुर ज्वाइन डायरेक्टर कार्यालय में पदस्थ विकास तिवारी भी शामिल थे। हालांकि अभी उन्हें बहाल कर दिया गया है और फिर से अपने पुरानी सीट में लौटने के लिए जुगत में लगे हुए है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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