बेलतरा विधायक की कथित बदले की राजनीति के खिलाफ 13 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय का घेराव
सरपंचों पर दबाव, पसंदीदा ठेकेदारों से काम कराने और प्रशासनिक हस्तक्षेप की शिकायतों को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों का आंदोलन
बिलासपुर। जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में 13 अक्तूबर को कलेट्रेट का घेराव किया जाएगा। उनका आरोप है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक राजनीतिक बदले की भावना से जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। सरपंचों पर दबाव बनाकर पसंदीदा ठेकेदारों से पंचायत का कार्य कराया जा रहा है। विकास कार्यों में राजनीतिक भेदभाव, प्रशासन पर दबाव, अवैध उत्खनन एवं अनुचित धन वसूली से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए। इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।
शनिवार को विजय केशरवानी के घर में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की एक बैठक हुई जिसमें यह बात सामने आई कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंच, कांग्रेस कार्यकर्ता, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारीगण एवं क्षेत्र के प्रमुख नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। बेलतरा विधायक द्वारा कथित रूप से राजनीतिक विरोध रखने वाले जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के विरुद्ध बदले की भावना से प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है।इन्हीं शिकायतों और कथित राजनीतिक दबाव के विरोध में बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सरपंचों एवं नागरिकों ने आगामी 13 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर अपनी आवाज जिला प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच, प्रशासनिक दबाव से मुक्ति और जनप्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार की मांग करना है। बता दे विजय केशरवानी अस्वस्थ थे और बॉम्बे (मुंबई) में उपचार कराने के बाद स्वास्थ्य लाभ लेकर हाल ही में वापस लौटे हैं। उनके स्वास्थ्य लाभ के बाद निज निवास पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने पहले उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं। इसके पश्चात क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं, पंचायत कार्यों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप, सरपंचों पर दबाव, पसंदीदा ठेकेदारों से कार्य कराने की शिकायत, प्रशासनिक दबाव, अवैध उत्खनन एवं अन्य गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर प्रशासन स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई एवं जांच नहीं होती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना आवश्यक होगा। इसी क्रम में 13 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय घेराव का निर्णय लिया गया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करना नहीं है लेकिन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के तहत क्षेत्र की गंभीर शिकायतों को जिला प्रशासन के संज्ञान में लाकर निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई की मांग करना है।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा शिकायत की गई है कि —
* सरपंचों एवं पंचायत प्रतिनिधियों पर कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा है कि पंचायत के विकास कार्य विधायक के पसंदीदा एवं करीबी ठेकेदारों से ही कराए जाएं।
* कुछ मामलों में विकास कार्य शुरू होने से पहले ही संबंधित ठेकेदारों को कथित रूप से अग्रिम भुगतान किए जाने की शिकायत है।
* जो पंचायत प्रतिनिधि इस दबाव को स्वीकार नहीं करते, उनके पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित किए जाने अथवा स्वीकृति रोकने की शिकायतें हैं।
* कई मामलों में पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को भी इसी प्रकार के दबाव एवं राजनीतिक हस्तक्षेप से जोड़कर शिकायत की गई है।
* ठेकेदारों द्वारा कराए गए कार्यों की गुणवत्ता खराब होने की शिकायत होने के बावजूद जनप्रतिनिधि कथित राजनीतिक दबाव के कारण खुलकर आवाज नहीं उठा पा रहे हैं।
प्रशासन पूरे बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में यह जांच करे कि किस-किस पंचायत में किन ठेकेदारों को कार्य दिए गए, किस प्रक्रिया के तहत दिए गए, कितना भुगतान हुआ और क्या किसी ठेकेदार को कार्य प्रारंभ होने से पूर्व अग्रिम भुगतान किया गया। धनंजय सिंह वर्तमान में बेलतरा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं, कई बार निर्वाचित सरपंच रह चुके हैं तथा वर्तमान में सरपंच संघ के अध्यक्ष भी हैं। उनके संबंध में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा यह गंभीर शिकायत सामने आई है कि राजनीतिक विरोध के कारण उनके ऊपर लगातार प्रशासनिक दबाव बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार उनके रिश्तेदार के घर से जुड़े भूमि/सीमा संबंधी मामले में बारिश के दौरान बिना पूर्व सूचना के तहसीलदार स्तर के अधिकारियों द्वारा सीमांकन की कार्रवाई कराई गई। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस कार्रवाई के पीछे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय किसी प्रकार का बाहरी अथवा राजनीतिक दबाव था। इसके बाद अब 6 अक्टूबर को पुनः सीमांकन के लिए नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। लगातार इस प्रकार की कार्रवाई को लेकर जनप्रतिनिधियों ने आशंका व्यक्त की है कि कहीं इसका संबंध राजनीतिक प्रतिशोध से तो नहीं है। इसके अलावा धनंजय सिंह के सरपंच रहते हुए उनके पंचायत सचिव के स्थानांतरण को भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा राजनीतिक दबाव एवं बदले की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
धनंजय सिंह का मामला अकेला नहीं है। क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों द्वारा यह शिकायत की गई है कि कांग्रेस विचारधारा से जुड़े सरपंचों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के विरुद्ध अधिकारियों के माध्यम से लगातार दबाव एवं प्रशासनिक कार्रवाई कराए जाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत यह भी है कि जो जनप्रतिनिधि विधायक के कथित दबाव के अनुरूप कार्य नहीं करते, उनके पंचायतों में विकास कार्यों को प्रभावित किया जाता है अथवा उनके पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जाते हैं। हमारी गंभीर शिकायत है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों में कथित रूप से राजनीतिक पसंद-नापसंद का प्रभाव पड़ रहा है। विकास कार्य किसी व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं हैं। वे जनता के अधिकार एवं सार्वजनिक धन से संचालित कार्य हैं। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में रेत एवं मुरुम के कथित अवैध उत्खनन को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। क्षेत्र में अवैध उत्खनन, परिवहन, निर्माण कार्यों से जुड़े कथित दबाव तथा अनुचित धन वसूली की शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। पूरे बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में पंचायतों द्वारा पिछले वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की सूची तैयार की जाए तथा प्रत्येक कार्य में ठेकेदार/एजेंसी, स्वीकृत राशि, भुगतान राशि, अग्रिम भुगतान, कार्य की वर्तमान स्थिति एवं तकनीकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए।
1. बेलतरा विधायक द्वारा कथित राजनीतिक बदले की भावना से जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को परेशान किए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए।
2. सरपंचों एवं पंचायत प्रतिनिधियों पर पसंदीदा ठेकेदारों से कार्य कराने के कथित दबाव की जांच की जाए।
3. कार्य प्रारंभ होने से पूर्व किए गए कथित अग्रिम भुगतानों की जांच की जाए।
4. दबाव का विरोध करने पर प्रभावित हुए विकास कार्यों एवं पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की जांच की जाए।
5. श्री धनंजय सिंह के मामले में सीमांकन, नोटिस एवं पंचायत सचिव के स्थानांतरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
6. कांग्रेस विचारधारा से जुड़े अन्य पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायतों की जांच की जाए।
7. पूरे बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के पंचायत विकास कार्यों में राजनीतिक भेदभाव की शिकायतों की समीक्षा की जाए।
8. पंचायतों में कार्य करने वाले सभी ठेकेदारों एवं उन्हें किए गए भुगतानों की विस्तृत जांच कराई जाए।
9. रेत एवं मुरुम के कथित अवैध उत्खनन की जांच कराई जाए।
10. अनुचित धन वसूली एवं प्रशासनिक दबाव से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाए।
11. अधिकारियों पर कथित राजनीतिक दबाव की जांच की जाए।
12. उपरोक्त सभी शिकायतों पर समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
विजय केशरवानी ने कहा कि शिकायतों एवं मांगों को लेकर 13 अक्टूबर को बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सरपंचगण एवं नागरिक कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। हम जिला प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि उससे पहले इन शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। यदि शिकायतों पर निष्पक्ष जांच नहीं होती, समस्याओं का समाधान नहीं निकलता और कथित राजनीतिक दबाव, बदले की भावना तथा विकास कार्यों में हस्तक्षेप जारी रहता है, तो 13 अक्टूबर का कार्यक्रम व्यापक जनआंदोलन की दिशा में एक लोकतांत्रिक कदम होगा। पूर्व जिला जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी का कहना है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन संविधान और कानून हमेशा रहते हैं। किसी विधायक के राजनीतिक प्रभाव में आकर यदि कोई अधिकारी बदले की कार्रवाई या नियम-विरुद्ध काम में सहभागी बनता है, तो यह याद रखना चाहिए कि हर कार्रवाई का रिकॉर्ड रहता है। आज सत्ता के प्रभाव में लिए गए फैसलों को जनता कल भी याद रखेगी। इसलिए किसी व्यक्ति के दबाव में नहीं, संविधान और कानून के अनुसार काम करें। यही लोकतंत्र और प्रशासन, दोनों के हित में है। कांग्रेस नेता राजेंद्र डब्बू साहू, धनंजय सिंह ठाकुर (ब्लॉक अध्यक्ष), प्रभंजन बंटी बैसवाड़े (ब्लॉक अध्यक्ष), शीतल दास मानिकपुरी, मनीष घड़रेवाल, संतोष साहू, राम प्रसाद साहू, रूप नारायण बाश, धुर्वे कुमार साहू, कुशल वर्मा, अमित यादव, धनंजय यादव, राम कुमार भोई, राजेंद्र मिथुन वर्मा, किशन पटेल, इंद्र कुमार साहू, अविनाश ढीबर, आकाश यादव, आकाश भोई, रुद्र कुमार सूर्यवंशी, जय प्रकाश घवई, फिरंता साहू, अमन दास, सुख सागर कुकर्रे, रूपेश कश्यप, प्रदीप साहू।
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