निलंबित ADG जीपी सिंह हाईकोर्ट की शरण में, मांगा CBI जांच, कहा- कुछ अधिकारी और नेता उन्हें फंसा रहे

रायपुर। राजद्रोह का मामला दर्ज होते ही निलंबित ADG जीपी सिंह हाईकोर्ट की शरण मे आ गए है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत करते हुए ACB और सिटी कोतवाली रायपुर में दर्ज मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है।

जीपी सिंह की याचिका में कहा गया है कि उन्हें सरकार के कुछ अधिकारी फंस रहे है। जिस डायरी और कागजों के आधार पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है वह सालों पुरानी है। कचरे, नाली में फेंकी हुई थी और उसे बंगले में छापा मारने वाले खुद ढूंढकर लाए थे। एक डायरी जिसे पुलिस सबूत बता रही है, उसके पन्नें भीगे हुए थे और पुलिस ने उसे सूखाने के बाद उसमें जो अस्पष्ट शब्द लिखे हैं उसके आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।

याचिका में जीपी सिंह की ओर से यह भी कहा गया है कि उन्हें डायरी लिखने की आदत रही है। किसी व्यक्ति को डायरी लिखने की आदत हो और वह किसी मामले में कुछ लिखता है। इसका मतलब यह तो नहीं हो जाता कि वह उसमें शामिल हो। वह तो अपनी मन की बातें लिखता है। फिर उसके लिखे का पुलिस द्वेषवश कुछ और मतलब निकाल ले और अपराध दर्ज कर ले ये न्यायोचित नहीं है।

याचिका में प्रमुखता से जो बात रखी गई है वह है सरकार में दखल रखने वाले कुछ नेताओं और अधिकारियों ने मिलकर जीपी सिंह को फंसाया है। याचिका में हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा गया है कि यह पूरी कार्रवाई इसलिए हुई है कि उन्होंने कुछ अवैध कामों को करने से मना किया था। उनके असहयोग करने के कारण कुछ अधिकारियों ने पहले उन्हें धमकी दी और बाद में आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगाते हुए एसीबी, ईओडब्ल्यू का छापा पड़वाया। इसमें भी बात नहीं बनी तो उनके खिलाफ राजद्रोह का अपराध गलत तरीके से दर्ज कर दिया गया।

00 अग्रिम जमानत के लिए आवेदन

एक ओर जीपी सिंह हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग को लेकर याचिका लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे रायपुर की अदालत में अपनी अग्रिम याचिका की अर्जी भी लगा रहे हैं। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जो धाराएं लगी हैं उनमें तो गिरफ्तारी का खतरा कम है, लेकिन राजद्रोह की धाराओं के तहत उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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