रायपुर। प्रदेश की राजधानी रायपुर में फर्जी बिल के माध्यम से खरीदी-बिक्री बताकर करोङो रुपए की GST चोरी का मामला आया है। अभी तक जांच में 7 करोड़ रुपए से ज्यादा की टेक्स चोरी सामने आई है। इस मामले में GST इंटेलीजेंस ने दो लोगो को गिरफ्तारकर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जिन्हें रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
जीएसटी इंटेलीजेंस महानिदेशालय ने फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसे रायपुर निवासी दो दोस्त चला रहे थे। आरोपियों के नाम रोहन तन्ना (31) और अभिषेक पाण्डेय (24) बताया जा रहा है। मंगलवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
नवम्बर 2020 से भारत सरकार, राजस्व विभाग, सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस द्वारा देश भर में चल रहे फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के रैकेट पर नकेल कसने के लिए विशेष अभियान शुरू किया था। जिसमें प्रदेश एवं देश भर में कई आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। इसी कड़ी में (जीएसटी) इंटेलीजेंस रायपुर द्वारा की जा रही एक जांच में एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। जिसकी कार्यवाही पिछले कुछ महीनों से निरंतर चल रही थी।
(जीएसटी) इंटेलीजेंस रायपुर जोनल इकाई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल अजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व एवं एडिशनल डायरेक्टर नेम सिंह की अगुवाही में एवं डिप्टी डायरेक्टर टिकेन्द्र कुमार कृपाल के निर्देशन में सात महीनों से चल रही जांच में आज विभाग को कामयाबी हासिल हुई है। एक ऐसे फेक बिल के रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें 8 से अधिक फर्जी फर्म बनाकर लगभग 7 करोड़ रुपए की GST की चोरी करके शासन को राजस्व क्षति पहुंचाई है। इन त फर्जी फर्मों से फर्जी बिल जारी कर उनके आधार पर विभिन्न फर्मों को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पारित किया गया।
जांच से जुड़े सुराग जुटाने के लिए कई जगह छापेमार कार्यवाही की गई जिसमें पता चला कि रायपुर स्थित विपिन तन्ना की फर्म मेसर्स जे.आर. ट्रेडर्स के ही ऑफिस से कई भिन्न फर्मों का संचालन किया जाता था और सभी फर्मों के प्रोप्राइटर डमी थे एवं असल में उन सभी फर्मों को कहीं न कहीं रोहन तन्ना एवं अभिषेक पाण्डेय द्वारा ही संचालित किया जाता था। कई फर्मों से माल का बेचना दिखाया गया लेकिन उसमें कोई भी खरीदी नहीं थी। वहीं कई ऐसी भी फर्म पाई गई, जिनकी खरीदी अस्तित्वहीन अर्थात बोगस फर्मों से ही थी। एक फर्म मेसर्स अभिषेक मार्केटिंग जिसके प्रोप्राइटर अभिषेक पाण्डेय थे। उसमें भी या तो इन्ही बोगस फर्मों द्वारा बिल पाकर आगे बेचे गए थे, लेकिन बिना खरीदी के सिर्फ बिल्स बेचे गए थे। ऐसे तमाम तथ्य सामने आने के बाद अधिकारियों के कान खड़े हुए। आगे जब भी जांच के लिए दोनों रोहन तन्ना एवं अभिषेक पाण्डेय को विभाग द्वारा बुलाया गया, वे हाज़िर नहीं हुए एवं रायपुर शहर से भी भाग खड़े हुए।
इस सम्बन्ध में आरोपियों द्वारा कई बार समन्स की अनदेखी किये जाने पर विभाग द्वारा न्यायालय में भी शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद पिछले दो महीनों से अधिकारियों द्वारा वेश बदल बदल कर आरोपियों के कई ठिकानों पर निगरानी किया जा रहा था। जिसके चलते दोनों को दबोचा गया। GST इंटेलिजेंस, रायपुर के अधिकारियों द्वारा दोनों ही आरोपियों को गिरफ्तार कर रायपुर न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उसको 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में 2 अगस्त तक जेल भेज दिया गया। ज्ञात हो कि फेक ITC के खिलाफ दर्ज मामलों में विभाग द्वारा अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और लगभग 150 करोड़ की कर वसूली भी की जा चुकी है। GST इंटेलिजेंस रायपुर जोनल इकाई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल अजय कुमार पाण्डेय के अनुसार फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट की चोरी से जुड़ा यह बड़ा मामला है, जिसमें 8 से अधिक फर्जी फर्मों को बनाकर शासन को राजस्व की हानि पहुंचाई गई थी।
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