बिलासपुर। छत्तीसगढ़ एसीबी और पुलिस के शिकंजे में फंसे एडीजी जीपी सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने राजद्रोह और भ्रष्टाचार से जुड़े दोनों मामले में प्रस्तुत उनके आवेदन खारिज कर दिए हैं। श्री सिंह ने 9 जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद शाम होने से पहले राज्य सरकार ने भी हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर दिया था।
अपने आवेदन में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से कहा था की सिंह को कोई भी राहत देने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए। दूसरी ओर जीपी सिंह ने रायपुर की अदालत में अपनी अग्रिम याचिका की अर्जी भी दायर की थी। सुनवाई के लिए पुलिस से केस डायरी की मांग की गई, लेकिन कंप्लीट नहीं होने पर जमानत याचिका वापस ले ली गई थी। साथ ही कहा है कि केस डायरी देखी है। उसके बाद जांच पर रोक लगाया जाना सही नहीं है। ऐसे में अब निलंबित किए गए IPS जीपी सिंह की कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है।
सुनवाई के दौरान शुक्रवार को हाईकोर्ट ने कहा कि एडीजी जीपी सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत में दायर की थी। फिर बाद में उसे वापस ले लिया इस आधार पर उनका पहला एप्लीकेशन रिजेक्ट किया जाता है। वहीं दूसरे एप्लीकेशन के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि हमने केस डायरी देख ली है। ऐसे में जांच रोकना ठीक नहीं होगा। ऐसे में उनकी दोनों याचिकाओं को खारिज कर कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
एडीजी जीपी सिंह की याचिका पर 15 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार और राजद्रोह दोनों मामलों की केस डायरी तलब की थी। साथ ही सरकार से उसका पक्ष भी पूछा था। वहीं, जीपी सिंह की ओर से कहा गया था कि अवैध कामों के लिए मना करने पर सरकार में दखल रखने वाले कुछ नेताओं और अफसरों ने मिलकर उन्हें फंसाया। वह जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, पर मामला CBI या किसी अन्य स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपा जाए।
दरअसल, सीनियर IPS जीपी सिंह ने अधिवक्ता किशोर भादुड़ी के माध्यम से रिट पिटिशन दायर की थी। पहली याचिका में उन्होंने ACB और रायपुर सिटी कोतवाली में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की स्वतंत्र एजेंसी जैसे CBI से जांच कराने, अंतरिम राहत देने और उनके खिलाफ चल रही जांच पर रोक लगाने की भी मांग की। वहीं उनके खिलाफ दायर राजद्रोह के केस को भी याचिका दायर कर चुनौती दी। दोनों ही मामलों में कोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया।
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