बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिजली दुर्घटना में किसी की मौत होती है तो बिजली कंपनी जिम्मेदार होगा। कोर्ट ने मृतक ठेका श्रमिक के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। साथ ही मामले में 45 दिनों के भीतर चार लाख 50 हजार स्र्पये मुआवजा राशि देने का आदेश दिया है।
बलौदाबाजार जिले के परसाडीह कैथा निवासी ओमप्रकाश साहू ने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें बताया है कि याचिकाकर्ता का बेटा रविंद्र कुमार सिंह महासमुंद में क्रेडा के अधीनस्थ अक्षय ऊर्जा एजेंसी द्वारा स्थापित सौर संयंत्र के संचालन एवं रखरखाव के लिए नियुक्त किया गया था। 16 दिसंबर 2019 को वह काम कर रहा था। इसी दौरान वह विद्युत वितरण कंपनी के बिजली तार की चपेट में आ गया। करेंट लगने से उसकी मौत हो गई। याचिकाकर्ता ने मुआवजे के लिए पहले क्रेडा और बाद में बिजली कंपनी के अधिकारियों को आवेदन दिया। सुनवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि खतरनाक प्रकृति के कार्य करने वाली किसी संस्था, विभाग या कंपनी के काम के दौरान हादसे से किसी की मौत होती है तो कठोर दायित्व का सिद्धांत के तहत संस्था सदैव उत्तरदायी होगी। यह संवैधानिक प्रावधान है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश विद्युुत मंडल विरुद्ध शैल कुमारी के प्रकरण में दिए गए आदेश का भी हवाला भी दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस गौतम भादुड़ी ने याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत होकर याचिका को स्वीकार किया। कोर्ट ने विद्युत वितरण कंपनी को आदेशित किया है कि 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को चार लाख 50 हजार मुआवजा राशि भुगतान करें। तय समय पर भुगतन नहीं करने पर नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा।
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