रायपुर। भाजपा सरकार के समय से शुरू हुई मीटर रीडिंग की ठेका पद्धति समाप्त होने वाली है। भूपेश सरकार ने मीटर रीडिंग के लिए छत्तीसगढ़ के 10वीं और 12वीं पास युवकों की भर्ती करने का निर्णय लिया है। ठेका पद्धति से ठेकेदार तो मालामाल हो रहे है लेकिन रीडिंग करने वाले कर्मचारियों का भारी शोषण हो रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी ठेकेदारों से कमीशन पाने के बाद आंख मूंद लेते है। यही स्थिति सब स्टेशन को ठेकेदारी में दिए जाने से भी हो रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी नवीन मीटर वाचक योजना लागू की है। इसके तहत कंपनी मीटर रीडिंग के लिए पहले से चल रहे ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने की तैयारी की गई है। उनकी जगह पर स्थानीय बेरोजगार युवाओं से सीधे करार किया जाएगा। बेरोजगारों को एक निश्चित क्षेत्र में निम्न दाब और घरेलू उपभोक्ताओं के मीटर रीडिंग की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस काम के लिए शैक्षणिक योग्यता हायर सेकंडरी निर्धारित की गई है।
कम्प्यूटर में डिप्लोमा, डिग्री अथवा आईटीआई पास युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी। यहीं नहीं ठेका पद्धति में वितरण कंपनी के लिए काम कर चुके मीटर रीडर को प्राथमिकता मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में 12वीं पास उपलब्ध नहीं रहने पर 10 वीं पास को भी मौका दिया जाएगा। लेकिन शर्त यह होगी कि कौशल विकास योजना के तहत मीटर रीडर का प्रशिक्षण लिया होना चाहिए।
विद्युत वितरण कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार बिजली मीटरों की रीडिंग करके युवा महज 15 दिनों में साढ़े सात हजार रुपये की कमाई कर सकेंगे। प्रदेश के कई जिलों में यह काम युवा करने भी लगे हैं। आने वाले समय में और ज्यादा युवकों को काम मिलेगा, क्योंकि जैसे-जैसे पुराना ठेका समाप्त होगा, इनके स्थान पर सीधे बेरोजगार युवकों को ही काम दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में 55 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से ज्यादातर उपभोक्ताओं के बिजली मीटरों की स्पाट रीडिंग होती है। इसके लिए कंपनी अब तक ठेका प्रथा से काम चलाती आ रही है, लेकिन अब इस प्रथा काे बंद करने का फैसला लिया जा चुका है। अब सीधे बेरोजगार युवकों को काम दिया जा रहा है। अभी ठेका लेने वालों को कंपनी से प्रति मीटर की रीडिंग के पांच रुपये मिलते हैं, लेकिन ये रीडिंग करने वालों को तीन रुपये के हिसाब से पैसे देते हैं। इसी के साथ ठेकेदार 25 दिनों में रीडिंग पूरी करते हैं, जबकि अब युवकों को 15 दिनों का लक्ष्य दिया गया है।
मीटर रीडिंग करने के लिए इसका दर तय कर दिया है। शहरों में प्रति मीटर की रीडिंग के लिए पांच रुपये दिए जाएंगे। रीडिंग करने वाले को 15 दिनों में 15 सौ मीटरों की रीडिंग करनी होगी। इसके एवज में साढ़े सात हजार दिए जायेगे। वहीं गांवों में रीडिंग के लिए छह रुपये प्रति मीटर के मिलेंगे। गांवों में 12 सौ मीटरों की रीडिंग करनी होगी। यहां के युवकों को 72 सौ रुपये मिलेंगे। बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सात रुपये प्रति मीटर की रीडिंग के मिलेंगे। यहां पर 15 दिनों में एक हजार मीटरों की रीडिंग करनी होगी। यहां के युवकों को सात हजार रुपये मिलेंगे।
रीडिंग का काम करने के लिए युवकों के पास अपना मोबाइल और नेट पैक का होना जरूरी है। इसी के साथ युवकों को बिल के लिए छोटा प्रिंटर खुद का लेना होगा। युवकों को अपना पंजीयन संबंधित क्षेत्र के डीसी सेंटर में कराना होगा। पंजीयन का कोई शुल्क नहीं है। एक डीसी सेंटर में अगर दस रीडरों की जरूरत हैं और इससे ज्यादा आवेदन आते हैं तो चयन लाटरी से किया जाएगा।
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