बिलासपुर। शिक्षक का पेंशन व GPF अटकाना स्कूल के प्राचार्य को मंहगा पड़ गया। हाईकोर्ट ने पेंशन और GPF की राशि तत्काल उपलब्ध कराने के तो निर्देश दिए ही क्षतिपूर्ति की राशि प्राचार्य को अपनी जेब से भरनी पड़ेगी। हाईकोर्ट ने भुगतान में देरी से जो नुकसान हुआ है, उसके एवज 10 प्रतिशत की दर से पेनाल्टी भुगतान करने के आदेश दिए है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार हायर सेकेंडरी स्कूल जर्वे ब्लॉक करतला जिला कोरबा का है। जहां से पिछले साल 30 जून 2020 को व्यख्याता शिक्षक सनत कुमार रिटायर हुए थे। 63 साल के सनत कुमार साहू ने जब अपने पेंशन और GPF भुगतान के लिए आवेदन किया तो DDO ने टालमटोल शुरू कर दिया। अपने हक़ के पेंशन और GPF के लिए दर्जनों बार रिटायर शिक्षक ने दफ्तर के चक्कर लगाए, लेकिन DDO ने ना तो उनका काम किया और ना ही कोई स्पष्ट जानकारी दी। यही नही पेंशन, GPF रोकने का कोई कारण भी नही बताया। फोन करने पर DDO ने फोन उठाना भी बंद कर दिया। जिसके बाद सनत कुमार साहू ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शिक्षक के 30 जून 2020 को रिटायरमेंट के 15 महीने बाद भी ना तो 42,224 पेंशन प्रतिमाह के हिसाब से 633360 रुपये जारी किया गया और ना ही जमा पूंजी जीपीएफ की राशि लगभग 22 लाख रुपये सेटेलमेंट किया था। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर माना और इस बात के निर्देश दिए कि तत्काल पेंशन और जीपीएफ की राशि का भुगतान किया जाए, साथ ही 10 प्रतिशत सलाना की दर से क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने कहा है कि क्षतिपूर्ति की राशि जिम्मेदार अधिकारी को खुद से देना होगा।
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