बिलासपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एक बार फिर से अपात्र को नियुक्ति देने का मामला सामने आया है। इस बार DEO कार्यालय ने इसे शिक्षक को नियुक्ति दे दिया है जो उम्र के मामले में लगभग 7 महीना कम है। इस नियुक्ति में स्थापना शाखा की भूमिका संदिग्ध माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभी अनुकंपा नियुक्ति के मामले में जांच चल ही रह है कि फिर से एक अपात्र को नियुक्ति देने का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग ने एक ऐसे अभ्यर्थी को नियुक्ति दे दिया है जो उम्र के मामले में अपात्र है। इस नियुक्ति में स्थापना शाखा के एक बाबू की भूमिका संदिग्ध है। दरअसल मामला शिक्षकों की सीधी भर्ती का है। पिछले दिनों 14 शेक्स शिक्षकों की सीधी भर्ती से नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया था इसमें विक्रांत कुमार नाम के अभ्यर्थी की भी नियुक्ति हुई थी। शासन की शर्तों के अनुसार नियुक्ति के समय अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए लेकिन अभ्यर्थी की उम्र 20 साल 5 महीना और 10 दिन ही हुआ था। जिला शिक्षा विभाग के स्थापना शाखा ने अपात्र अभ्यर्थी को पात्र बताते हुए तखतपुर ब्लाक के प्राथमिक शाला सफ़रिभाठा के लिए नियुक्ति आदेश कर दिया है। इस प्रकार से अयोग्य / अपात्र अभ्यर्थी को पात्र करखे नियुक्ति देते हुए शाला आबंटित करना पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता में प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। इससे यह भी साबित हो रहा है कि शिक्षा विभाग में हर भर्ती में अनियमितता हो रही है। इस मामले में DEO डीके कौशिक से सम्पर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया तब सहायक जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि ऊपर के आदेश पर शिक्षक को ज्वाइनिंग नहीं दी गई है।
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