बिलासपुर। नगर निगम में पदस्थ रहे एक पूर्व अधिकारी ने शहर में अवैध प्लाटिंग करके करोड़ों का माल बनाया। यही नहीं, नाम सामने न आए इसलिए अधिकारी ने अपनी सास को बिल्डर बना दिया। अवैध प्लाटिंग पर निगम का बुलडोजर भी चला लेकिन जिधर अधिकारी अपने सास के नाम पर प्लाटिंग किया उधर कार्रवाई भी नहीं हुई।
ज्यादातर बड़े अधिकारी नंबर दो की संपत्ति या भ्रष्टाचार की कमाई अपने भाई – भतीजे के नाम पर करने के बजाए अपने सास, ससुर, साले – सालियों के नाम करना ज्यादा जरूरी समझते है। बिलासपुर नगर निगम में पदस्थ एक अधिकारी ने भी यही किया है। इस अधिकारी ने बिलासपुर में पोस्टिंग होते ही माल बटोरने के लिए गुणाभाग शुरू कर दिया। इसके लिए सबसे पहले अपनी सास को गीता पांडेय पति आदित्य नारायण पांडेय को बिल्डर बनाया। चूंकि सास का पति यानी अधिकारी का ससुर शासकीय कर्मचारी है लिहाजा सास के नाम से पति का नाम हटाकर पिता का नाम लिखाया। ये साजिश सिर्फ इसलिए रची गई, क्योंकि सरकंडा क्षेत्र स्थित करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन को बेचना था और अफसर के कार्यकाल में यहां की 70-80 प्रतिशत जमीन को टुकड़ों में बेच दिया गया। अब उसी फर्म के सहारे बिलासपुर शहर के आसपास अन्य स्थानों पर धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग कर बिक्री की जा रही है। गीता पांडेय पति आदित्य नारायण पांडेय के नाम पर वर्तमान में शहर के कई इलाकों में बेशकीमती जमीन है। अलग – अलग इलाकों में दर्ज जमीन में उनका पता भी अलग-अलग दर्ज है। सरकंडा क्षेत्र में इनके नाम पर खसरा नंबर 67 में अच्छा-खासा जमीन दर्ज थी। इस पूरे खेल में अधिकारी ने एक अन्य सरकारी कर्मचारी की पत्नी को भी इसका भागीदार बनवाया है। ताकि उनकी अनुपस्थिति में वह उसकी सास का इस काम में मदद कर सके। ये कर्मचारी भी ससुर के साथ काम करता है और इसने भी अपने स्थान पर पत्नी को फर्म का पार्टनर बनाया है। इसने भी पति के स्थान पर अपने नाम के साथ पिता का नाम ही दर्शाया गया है। दोनों ने पति की जगह पिता का नाम दो कारणों से दर्शाया है। एक तो जमीन बेचने में सरकारी नियम कानून आड़े आ रहा था दूसरा पति की जगह पिता का नाम दर्शाने से पहचान छुपाया जा सकता है। क्योंकि लड़कियों की शादी के बाद पति को ही लोग जानते है पिता को केवल करीबी रिश्तेदार ही जानते है।
मजेदार बात तो ये है की नगर निगम पिछले दो – तीन साल में कई बार अवैध प्लाटिंग के खिलाफ मुहिम चलाया। कई अवैध प्लाटिंग वाले स्थान पर बुलडोजर चले, लेकिन अधिकारी की सास की अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर नहीं चला। अधिकारी जिस जिले में भी पदस्थ रहा अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए प्लाट पर बुलडोजर चलने नही दिया। और तो और नगर निगम के अधिकारी उन्हे नोटिस देने की भी हिम्मत नही जुटा पाए। अब जिन जमीन मोफियाओं के प्लाट पर निगम के अधिकारियों ने बुलडोजर चलाया है वे अधिकारी की सास के अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलवाना चाहते है। भूमाफियाओं ने अब उस रसूखदार अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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