बिलासपुर। SECL में 32 लाख रुपए का टेंडर घोटाला सामने आया है। अधिकारियों ने छाल में कार्यक्रम करने के लिए 3 लाख रुपए के काम को 32 लाख रुपए में ठेका दे दिया है। यही नहीं चहेते ठेकेदार को काम दिलाने के लिए रात 9 बजे ठेका ओपन किया और सुबह 10 . 30 बजे क्लोज कर दिया।
हर साल अरबों रुपए का कोयला बेचने वाली कंपनी SECL के लिए करोड़ – दो करोड़ रुपए का घोटाला कोई मायने नहीं रखता। यहां हर साल खरीदी और सप्लाई में अधिकारी कई करोड़ रुपए हजम कर जाते है। आज हम एक ऐसे घोटाले का जिक्र कर रहे है जिसकी राशि अधिकारियों के लिए लौंग चबाने जैसा है। अधिकारियों ने मात्र 32 लाख रुपए के घोटाले को अंजाम दिया है। दरअसल रायगढ़ के छाल में बरौद में CHP का शुभारंभ होना है। इस कार्यक्रम के लिए SECL प्रबंधन ने वाटरफ्रुफ पंडाल, मंच, माइक, कुर्सी, कनात आदि की व्यवस्था करने के लिए टेंट ब्यावसाईयों से निविदा आमंत्रित किया था। इन कामों के लिए एक टेंट व्यापारी को 32 लाख रुपए में ठेका दे दिया गया है। बताया जा रहा है की पूरा काम 3 लाख रुपए से ज्यादा का नहीं है। लेकिन अधिकारियों ने विशेष रुचि लेते हुए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। SECL के अधिकारियों ने इसके लिए नियम कानून को ताक पर रख दिया। प्रबंधन ने 22 फरवरी 2024 को रात नौ बजे टेंडर निकाला और सुबह 10 बजे क्लोज कर दिया। मतलब कोई भी व्यापारी जो टेंडर भरना चाहता है उसके लिए आवेदन जमा करने के लिए 12 घंटे का समय था। बताया जा रहा है की जिस टेंट व्यापारी को ठेका देना था उसे सब कुछ पहले से बता दिया गया था की टेंडर फॉर्म में कौन कौन से दस्तावेज लगेंगे। ताकि टेंडर ओपन होते ही वह आवेदन कर सके। जबकि अन्य टेंट ब्यावसाइयों को आवेदन डाउनलोड करने और दस्तावेजों की फोटोकॉपी करने में दिया गया समय निकल गया। जब ब्यवसायी आवेदन जमा करने पहुंचे तो पता चला समय समाप्त हो चुका है। अधिकारियों ने बड़ी चालाकी से 22 फरवरी को टेंडर ओपन किया और 23 फरवरी को सुबह 10 . 30 बजे क्लोज कर दिया। यही नहीं 15 मिनट बाद 10.45 बजे टेंट ब्यावसायी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया।
आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने तथा सतत विकास को बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप कल छत्तीसगढ़ में कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की तीन प्रमुख फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का वर्चुअल रुप में उद्घाटन करेंगे। यह परियोजनाएं 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की हैं और तेज, पर्यावरण अनुकूल और कुशल मशीनीकृत कोयला निकासी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें से एक दीपका क्षेत्र स्थित है। दीपका ओसीपी कोल हैंडलिंग प्लांट 211 करोड़ रुपये से अधिक लागत की एक प्रमुख परियोजना है। वार्षिक 25 मीट्रिक टन की कोयला हैंडलिंग क्षमता के साथ इस परियोजना में 20,000 टन की ओवरग्राउंड बंकर क्षमता और 2.1 किमी लंबी कन्वेयर बेल्ट है, जो प्रति घंटे 4,500 – 8,500 टन कोयले की तेजी से लोडिंग की सुविधा प्रदान करती है। दूसरा परियोजना एसईसीएल के रायगढ़ क्षेत्र में छाल ओसीपी कोल हैंडलिंग प्लांट है। इसे 173 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया है। इसमें वार्षिक 6 मीट्रिक टन कोयला संभालने की क्षमता के साथ एक ओवरग्राउंड बंकर, 1.7 किमी तक फैला एक कन्वेयर बेल्ट और 3,000 टन क्षमता का साइलो शामिल है। तीसरी परियोजना रायगढ़ क्षेत्र में बरौद ओसीपी कोल हैंडलिंग प्लांट है। इसे वार्षिक रूप से 10 मीट्रिक टन कोयले की हैंडलिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह 216 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो गया है। 20,000 टन की ओवरग्राउंड बंकर क्षमता तथा 1.7 किमी कन्वेयर बेल्ट से लैस इस परियोजना में एक रैपिड लोडिंग सिस्टम है। यह प्रति घंटे 5000-7500 टन कोयला लोड करने में सक्षम है, लोडिंग प्रक्रिया को काफी सुव्यवस्थित बनाता है और परिचालन दक्षता में योगदान देता है।
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