बिलासपुर। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव आते ही कई अधिकारियों का स्थानांतरण करके वाहवाही बटोर लेता है। लेकिन वास्तविकता कुछ और है। पहुंच और चढ़ावा देने वाले अधिकारी उनकी नजर से बच जाते है या बचा लिए जाते है। हम बात कर रहे है शिक्षा विभाग के JD ऑफिस में पदस्थ बेहद विवादित अधिकारी प्रशांत राय की। प्रशांत राय बिलासपुर के JD ऑफिस में पिछले 6 साल से पदस्थ हैं। पूरे संभाग के स्कूलों की मान्यता संबंधी काम इन्ही के पास है। इसके अलावा वित्त और शिकायत शाखा भी यही देख रहे है। विभागीय सूत्र बताते है कि लेनदेन और मामला सलटाने में उन्हें महारत हासिल है। पिछले दिनों नरेन्द्र बंजारे, संतोष शुक्ला और विनोद तिवारी ने उनके खिलाफ चुनाव आयोग और डायरेक्ट्रेट में शिकायत की थी। अपने शिकायत में तीनों ने बताया है कि विभाग से उनका पांच बार स्थानांतरण हो चुका है। लेकिन हर बार ऊपर चढ़ावा देकर बच जाते हैं। राय के खिलाफ एक महिला ने शहर के एक थाना मे FIR भी दर्ज कराया है। बावजूद इसके अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। शिक्षक पदोन्नति के दौरान उन्होने संशोधन घोटाले को भी अंजाम दिया था। उन्होने 249 शिक्षकों की पदोन्नती के बाद हुए ट्रांसफर आदेश को संशोधित किया था। शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने 11 मार्च को डायरेक्टर को पत्र लिखा है कि लौटती डाक से यानी 12 फरवरी को रिपोर्ट पेश करें। लेकिन आयोग का पत्र डेयरेक्ट्रेट में धूल फांकता रहा। इसके बाद 20 मार्च को डेयरेक्ट्रेट से JD ऑफिस को पत्र भेजा गया लेकिन 21 मार्च खत्म होने के बाद भी कार्यालय ने जवाब पेश नहीं किया है। अब सवाल ये उठ रहा है की जब निर्वाचन आयोग ने 12 मार्च तक जानकारी देने को कहा था तो डायरेक्ट्रेट से 20 मार्च को को पत्र क्यों जारी किया ? आखिर आयोग का पत्र डायरेक्ट्रेट में किसने दबा रखा था।
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