सर्पदंश मुआवजा का कमीशन खाने वाले दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार, कईयों पर गिरेगी गाज, पूरे गिरोह का होगा भंडाफोड़

बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ा कमीशन खाने वाले दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। दोनो SIMS पुलिस चौकी में पदस्थ थे और गिरोह के बहुत महत्वपूर्ण सदस्य थे। इसके पहले इस मामले में तहसील, SDM कार्यालय के बाबू और एक महिला डॉक्टर को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरोह ने सामान्य मौत को सर्पदंश से मौत बताकर सरकार से 17 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुआवजा उठा चुके है।

पुलिस ने शर्पदंश से मौत के बाद मुआवजा में बड़ा घोटाला करने वालों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने अपने विभाग के दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। दोनो हीरा खांडे के पूरे आपराधिक गिरोह में शामिल थे। इनका काम यह था की जब भी कोई dead body SIMS आती थी उस समय तत्काल खांडे गिरोह के सदस्य महेन्द्र मनहर को सूचित करते थे कि एक शव आया है। इनके परिजन भी आए हैं, इनको मिलकर समझा दो। इसके बाद मनहर हॉस्पिटल पहुंचकर मृतक के परिवार वालों को रुपयों और मुआवजे का लालच देकर उन्हें सर्पदंश का केस बनवाने के लिए तैयार कर लेता था। भले ही व्यक्ति की मौत अन्य किसी कारण से हुई हो। पैसे के लालच में आकर मृतक के परिवार वाले शासन के आपदा कोष से दी जाने वाली आपदा राशि का मात्र कुछ हिस्सा पाकर गिरोह के कारनामे में शामिल हो जाते थे। जबकि रकम की ज्यादातर राशि गिरोह के लोग हथिया लेते थे।
जिन पुलिस कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है उनको सूचना देने के बदले में और मृतक के परिवार वालों को तैयार करने में सहयोग करने पर कमीशन की बड़ी राशि मिलती थी। इसी आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई है। कल न्यायालय में रिमांड पर लेकर पूछताछ किया जाएगा।

इस घोटाले में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस ने अभी तक एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार को पहले गिरफ्तार कर चुकी है। एक महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस पूरे घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब मामला विधानसभा पहुंचा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने 2019 से 2023 के बीच हुए मुआवजा वितरण पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस संदिग्ध खेल की जांच की मांग की थी। जब शासन ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. सामान्य और संदिग्ध मौतों को सर्पदंश बताकर फाइलें तैयार की गई थीं। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि पिछले तीन साल में जसपुर जिले सर्पदंश से केवल 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर जिले में 431 मौतें दर्शाकर करीब 17.24 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किए जाने का दावा किया गया।

गिरफ्तार पुलिसकर्मी  -:  1. रामकुमार पाटनवार पिता स्व. देवनारायण पाटनवार उम 40 वर्ष निवासी बंधवा पारा सरकंडा
2. रामेश्वर भास्कर पिता स्वर्गीय अंजोर दास भास्कर उम्र 53 वर्ष निवासी सतनाम नगर अमेरी

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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